गुजरात के भरूच जिले में एक 27 वर्षीय युवक के साथ न्यूजीलैंड में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी ठगी की वारदात अंजाम दी गई. युवक ने इंस्टाग्राम पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन देखा और उसी के झांसे में आ गया. उसे भरोसा दिलाया गया कि न्यूजीलैंड में उसकी नौकरी पक्की है, बस टिकट लेकर पहुंचना है. इस लालच में उसने लाखों रुपये भी ठगों को दे दिए. बाद में पता चला कि पूरा मामला फर्जी था. अब इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
चार लोगों पर धोखाधड़ी का आरोप
इस मामले में वडोदरा के चार लोगों पर ठगी का आरोप लगा है, जिनमें एक महिला भी शामिल है. आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर भरूच के युवक से 25 लाख रुपये ले लिए. करीब एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पूरी रकम वापस नहीं की गई. युवक को सिर्फ 4 लाख रुपये लौटाए गए, जबकि 21 लाख रुपये अब भी बकाया हैं. पीड़ित ने मांजलपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है. पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है.
इंस्टाग्राम पर देखा था जॉब का विज्ञापन
पीड़ित युवक हर्ष ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एक कंपनी में काम करता है. करीब दो साल पहले उसने इंस्टाग्राम पर शिवानी जोशी नाम की महिला का न्यूजीलैंड में नौकरी से जुड़ा विज्ञापन देखा था. उसने विज्ञापन के आधार पर शिवानी से संपर्क किया. बातचीत के दौरान शिवानी ने उससे जरूरी दस्तावेज और बायोडाटा मांगा. हर्ष ने अगले ही दिन सभी दस्तावेज भेज दिए. इसके बाद उसे नौकरी का ऑफर दिया गया.
किचन हेड की नौकरी का झांसा
शिवानी जोशी ने हर्ष को बताया कि न्यूजीलैंड में निखिल ठक्कर के बर्गर शॉप में किचन हेड की पोस्ट खाली है. इसके लिए कुल 30 लाख रुपये खर्चा बताया गया. हर्ष की सहमति के बाद शिवानी ने निखिल ठक्कर से उसकी बात करवाई. ज़ूम ऐप पर ऑनलाइन इंटरव्यू आयोजित किया गया, जिसमें विनीत शाह भी मौजूद थे. इंटरव्यू के बाद हर्ष को बताया गया कि उसका चयन हो गया है. उसे एक एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट भी दिया गया.
किस्तों में लिए गए 25 लाख
नौकरी पक्की हो जाने के बाद हर्ष ने शिवानी के ऑफिस में 10 लाख रुपये नकद दिए. इसके 15 दिन बाद उसने 10 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए, जो शिवानी और विनीत के दोस्त अंकित रबारी को भेजे गए. बाद में निखिल ठक्कर ने शेष रकम विनीत शाह को देने के लिए कहा. बचे हुए 10 लाख में से हर्ष ने 3 लाख रुपये नकद और 2 लाख रुपये आरटीजीएस से शिवानी को दिए. इस तरह कुल 25 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए गए. टिकट का खर्च हर्ष ने खुद उठाया.
सिंगापुर एयरपोर्ट पर खुली पोल
नौकरी पक्की होने की बात कहकर हर्ष को टिकट बुक करने के लिए कहा गया. वह मुंबई से न्यूजीलैंड के लिए रवाना हुआ. लेकिन सिंगापुर एयरपोर्ट पर उसके इमीग्रेशन लेटर की जांच हुई तो वह फर्जी पाया गया. इसके बाद ऑकलैंड स्थित दूतावास से फोन आया और पूछताछ की गई. जांच में दस्तावेज फर्जी साबित हुए. अधिकारियों ने उसे भारत लौटने के लिए कह दिया.
एक साल बाद भी नहीं मिले पूरे पैसे
भारत लौटने के बाद हर्ष ने आरोपियों से संपर्क किया और पैसे वापस मांगे. लेकिन उसे सिर्फ 4 लाख रुपये ही लौटाए गए. बाकी 21 लाख रुपये अब तक वापस नहीं किए गए हैं. एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया. इससे परेशान होकर हर्ष ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना.
मांजलपुर थाने में मामला दर्ज
हर्ष ने शिवानी जोशी, विनीत शाह, निखिल ठक्कर और अंकित रबारी के खिलाफ मांजलपुर पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर विदेश नौकरी के विज्ञापनों से सावधान रहना कितना जरूरी है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों में पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही पैसे का लेन-देन करें.
ब्रिजेश दोशी