अपहरण का डरावना ग्राफ... देश में दिल्ली सबसे ऊपर, NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

NCRB Report: देश भर में अपहरण के मामलों में हैरान कर देने वाली बढ़ोतरी देखने को मिली है. दिल्ली से लेकर महानगरों तक हर जगह आंकड़े डराने वाले हैं. बच्चों का अपहरण सबसे बड़ा पैटर्न बनकर सामने आया है, जबकि घर से भागने की घटनाओं ने भी पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने अपहरण के साल 2023 के आंकड़े पेश किए हैं. (Photo: Representational) नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने अपहरण के साल 2023 के आंकड़े पेश किए हैं. (Photo: Representational)

aajtak.in

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  • 30 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:02 PM IST

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने साल 2023 में अपहरण केस के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस साल पूरे देश में ऐसे 1.16 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए. यह आंकड़ा साल 2022 की तुलना में 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाता है, जब 1,07,588 केस दर्ज हुए थे. इस तरह हर दिन औसतन 310 से ज्यादा अपहरण और घर से भगाने की घटनाएं दर्ज हुई थीं.

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एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में से लगभग 18 हजार केस ऐसे थे, जिनमें पीड़ित खुद ही घर से भागे थे. इनमें 9 हजार बच्चे और 8,800 वयस्क शामिल रहे. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई लोग प्रेम संबंधों के चलते या माता-पिता की डांट-फटकार से परेशान होकर घर से निकले थे. देश की राजधानी दिल्ली इस मामले में सबसे आगे निकली है. यहां 5,715 केस दर्ज हुए थे. 

यदि अपराध दर के लिहाज से देखें तो दिल्ली का औसत 26 फीसदी (प्रति लाख आबादी पर) रहा, जो पूरे देश में सबसे खराब स्थिति है. लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि दिल्ली में ऐसे मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर महज 6.6 फीसदी रही. रिपोर्ट यह भी बताती है कि अपहरण और घर से भागने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रेम विवाह जैसी घटनाएं रही हैं.

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इसके चलते 16 हजार 866 बच्चों और 15 हजार 790 वयस्कों को अगवा किया गया. इसके बाद गैरकानूनी गतिविधियों के लिए अपहरण का पैटर्न सामने आया, जिसमें 1,218 बच्चे और 740 वयस्क शामिल रहे. जब बरामदगी हुई तो तस्वीर और चौंकाने वाली सामने आईं. इससे पता चला कि कुल 9,251 बच्चे और 8,853 वयस्क अपने प्रेमियों के साथ रहने के लिए घर छोड़कर गए थे.

वहीं, 9,161 बच्चे और 6,413 वयस्क माता-पिता की डांट या अन्य कारणों से अपनी मर्जी से घर छोड़कर गए थे. कुल मिलाकर 2023 में अपहृत 1.16 लाख से ज़्यादा पीड़ितों में 70 फीसदी बच्चे रहे. इस तरह 82,106 बच्चों का अपहरण हुआ. इनमें 16,033 लड़के, 66,072 लड़कियां और एक ट्रांसजेंडर शामिल थे. वहीं, वयस्कों की संख्या 34,298 रही. इनमें 8,252 पुरुष और 26,042 महिलाएं थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, अपहृत व्यक्तियों में से करीब 68 फीसदी को ढूंढ लिया गया. लेकिन फिर भी 66,268 लोग लापता ही रहे. साल 2023 के दौरान 1,40,813 अपहृत व्यक्तियों को बरामद किया गया, जिनमें 31,837 पुरुष, 1,08,971 महिलाएं और 5 ट्रांसजेंडर शामिल थे. इनमें से 1,39,164 जीवित और 1,649 मृत पाए गए. हालांकि, इसमें साल 2022 में अपहृत हुए भी शामिल थे, जिन्हें 2023 में ढूंढा गया.

इन मामलों का निपटारा भी बेहद खराब रहा. साल 2023 में जांच के अधीन 1,80,591 मामलों में से सिर्फ 37 फीसदी में ही चार्जशीट दाखिल की गई. अदालतों में लंबित कुल 3,51,090 मामलों में दोषसिद्धि की दर मात्र 20.2 फीसदी रही. यानी हर 10 मामलों में से सिर्फ 2 में ही अपराधियों को सजा मिली. महानगरों में भी अपहरण और घर से भागने के मामलों का ग्राफ ऊपर ही गया. 

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20 लाख से ज्यादा आबादी वाले 19 महानगरों में साल 2023 के दौरान ऐसे 15,039 केस दर्ज हुए. यह साल 2022 के मुकाबले 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी है, जब 13,984 मामले दर्ज हुए थे. एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि महानगरों से 15,181 अपहृत व्यक्तियों को बरामद किया गया. इनमें 4,914 पुरुष और 10,267 महिलाएं थीं. इनमें से 15,167 लोग जीवित और 14 मृत मिले.

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