हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस स्टेशन में 1 जनवरी 2026 को हुए ब्लास्ट ने पूरे सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया था. नए साल की शुरुआत में हुए इस धमाके ने यह साफ कर दिया कि आतंकी नेटवर्क अब पुलिस ठिकानों को भी सीधे निशाना बना रहे हैं. शुरुआती जांच में इसे साजिशन हमला माना गया, जिसके तार सीमापार आतंकी नेटवर्क से जुड़ने लगे. पुलिस और खुफिया एजेंसियां तभी से इस मामले की परतें खोलने में जुटी थीं. हर कड़ी को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में अब एक बड़ा खुलासा हुआ है.
पंजाब पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट केस की जांच में पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. जांच के दौरान पाक-ISI समर्थित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े एक नार्को-टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है. इस मॉड्यूल के दो सक्रिय गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल में की गई. पुलिस के मुताबिक यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता खोल सकती है.
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शमशेर सिंह उर्फ शेरू उर्फ कमल और प्रदीप सिंह उर्फ दीपु के रूप में हुई है. दोनों पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर (SBS Nagar) जिले के राहों इलाके के रहने वाले हैं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे. जांच में सामने आया है कि वे सिर्फ स्थानीय अपराधी नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का हिस्सा थे. उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है.
आरोपियों से IED की बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) भी बरामद की है. यह बरामदगी उनके सीधे तौर पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की पुष्टि करती है. पुलिस का कहना है कि IED उसी तरह की थी, जैसी नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई थी. इससे यह साफ हो गया कि आरोपी केवल साजिशकर्ता नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से हमले की तैयारी और हमले में शामिल थे.
BKI मास्टरमाइंड से जुड़े तार
पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी BKI मास्टरमाइंड हरविंदर रिंडा और उसके करीबी गुरप्रीत उर्फ गोपी नवांशहरिया के नेटवर्क से जुड़े थे. आरोपी शुशांत चोपड़ा के निर्देशों पर काम कर रहे थे, जो इन आतंकियों का खास सहयोगी बताया जा रहा है. जांच में सामने आया है कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहा था. इसका मकसद पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था.
31 दिसंबर को रची गई थी साजिश
प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि 31 दिसंबर 2025 को आरोपी अपने दो अन्य साथियों के साथ पंजाब से हिमाचल प्रदेश तक IED लेकर पहुंचे थे. इसी IED का इस्तेमाल 1 जनवरी 2026 को नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट में किया गया. यह हमला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसका मकसद पुलिस में दहशत फैलाना था. पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि बड़े आतंकी प्लान का ट्रायल था.
NDPS केस से खुली आतंकी साजिश
नवांशहर के एसएसपी तुषार गुप्ता ने बताया कि यह पूरा मामला राहों थाने में दर्ज NDPS एक्ट के एक केस की जांच के दौरान सामने आया. जांच में आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां उजागर हुईं, जिसके बाद उनसे गहन पूछताछ की गई. पूछताछ में उन्होंने शुशांत चोपड़ा के निर्देशों पर काम करने की बात कबूल की. इसी खुलासे के बाद आतंकी साजिश की परतें खुलती चली गईं.
दो और आरोपी रडार पर
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के दो और साथी भी इस साजिश में शामिल थे, जिनकी पहचान कर ली गई है. उन्हें पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाएगा. इस मामले में बरामद IED ने आरोपियों की भूमिका को पूरी तरह प्रमाणित कर दिया है. जांच एजेंसियां अब पीछे और आगे दोनों कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं.
UAPA समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज
इस आतंकी साजिश के संबंध में राहों पुलिस स्टेशन में अलग से FIR संख्या 20 दिनांक 29/01/2026 दर्ज की गई है. इसमें आर्म्स एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, UAPA की कई धाराएं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस का कहना है कि यह केस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं, जिससे इस साजिश की पूरी तस्वीर सामने आएगी.
असीम बस्सी