शादी का ड्रामा, 3 लाख में सौदा और मानव तस्करी... आदिवासी युवती ने थाने जाकर किया खुलासा, चार पर केस दर्ज

पालघर में शादी के नाम पर 20 वर्षीय आदिवासी युवती को 3 लाख रुपये में बेच दिए जामे का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस ने उस युवकी के पति, उसकी मां और दो बिचौलियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पढ़ें इस घटना की पूरी कहानी.

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पीड़िता महाराष्ट्र के कटकारी आदिवासी समुदाय से है (फोटो-ITG) पीड़िता महाराष्ट्र के कटकारी आदिवासी समुदाय से है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • पालघर,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

Palghar Human Trafficking Case: महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुलिस ने बुधवार को चार लोगों के खिलाफ 20 वर्षीय आदिवासी युवती की कथित तौर पर 'बिक्री' का मामला दर्ज किया है. आरोप है कि शादी के नाम पर युवती को तीन लाख रुपये में बेच दिया गया. पुलिस के मुताबिक, यह सौदा दो बिचौलियों के जरिए हुआ था. यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. पीड़िता ने खुद थाने पहुंचकर पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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कटकारी समुदाय से है पीड़िता
पुलिस के अनुसार, पीड़िता महाराष्ट्र के कटकारी आदिवासी समुदाय से आती है. युवती ने अपनी शिकायत में बताया कि उसे जबरन नासिक के एक व्यक्ति से मई 2024 में शादी करने के लिए मजबूर किया गया. शादी के पीछे असली मंशा छिपी हुई थी, जिसका खुलासा बाद में हुआ. पीड़िता का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसकी मर्जी का कोई महत्व नहीं था. शादी को वैध और सामाजिक दिखाने के लिए पूरे मामले को विवाह का रूप दिया गया. बाद में उसे पता चला कि उसके साथ सौदेबाजी की गई थी.

तीन लाख रुपये में हुआ सौदा
एफआईआर के मुताबिक, आरोपी युवक और उसकी मां ने दो बिचौलियों को तीन लाख रुपये दिए थे. इन बिचौलियों ने युवती की तस्करी कर शादी कराने की व्यवस्था की. पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें पैसे के बदले युवती को सौंपा गया. बिचौलियों की भूमिका सिर्फ सौदे तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने शादी की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया. इस तरह शादी को मानव तस्करी का जरिया बनाया गया. पुलिस इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.

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शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना
पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे ससुराल में लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. उसे जातिसूचक गालियां दी जाती थीं और अपमानित किया जाता था. महिला ने बताया कि उसका पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता था. गर्भावस्था के दौरान भी उसे समय पर भोजन नहीं दिया गया. इस दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. प्रताड़ना से तंग आकर उसने कई बार विरोध करने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

बच्चे के जन्म के बाद मायके लौटी
युवती ने जून 2025 में एक बेटे को जन्म दिया. बच्चे के जन्म के बाद हालात और खराब हो गए, जिसके चलते वह अपने मायके लौट आई. वह अपनी मां के साथ रहने लगी और खुद को सुरक्षित महसूस करने लगी. मामला लंबे समय तक दबा रहा, लेकिन 6 जनवरी को स्थिति अचानक बदल गई. आरोप है कि आरोपी पक्ष जबरन बच्चे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा. इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई और मामला सामने आया.

चार आरोपियों पर केस
घटना के बाद वाडा पुलिस स्टेशन में आरोपी पति, उसकी मां और दो बिचौलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. यह केस भारतीय न्याय संहिता और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज हुआ है. वाडा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दत्तात्रेय बाजीराव किंड्रे ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है. पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है. पीड़िता और उसके बच्चे की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है. आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है.

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