पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है. जलांगी थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह 50 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई. परिवार का आरोप है कि SIR से जुड़े नोटिस के बाद पैदा हुए अत्यधिक मानसिक तनाव के चलते उनकी जान चली गई. मृतक की पहचान नवादापारा गांव निवासी अक्षत अली मंडल के रूप में हुई है.
परिजनों का कहना है कि अक्षत अली मंडल को एक नोटिस मिला था, जिसमें उनके बच्चों की संख्या छह से अधिक बताई गई थी. नोटिस मिलने के बाद से वो लगातार भयभीत रहने लगे थे. परिवार के सदस्यों ने बताया कि अक्षत अकेले रहते थे. उनके पांच बेटे राज्य से बाहर विदेश में काम करते हैं. नोटिस में बच्चों की संख्या को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई थी.
अक्षत अली मंडल के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि SIR नोटिस मिलने के बाद वो अपने बेटों को वापस बुलाने, अधिकारियों के सामने पेश होने और जरूरी दस्तावेज जुटाने को लेकर बेहद तनाव में थे. बताया गया कि नोटिस मिलने के कुछ ही दिनों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. परिजन उनको तुरंत सादिक़दिया ग्रामीण अस्पताल लेकर पहुंचे.
वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार का दावा है कि नोटिस से उपजे मानसिक दबाव ने उनकी सेहत पर गंभीर असर डाला. मृतक की पत्नी शरीफ़ा बीबी ने बताया कि नोटिस उनकी मौत से महज तीन दिन पहले आया था. इसके बाद से उनके पति लगातार डर में जी रहे थे. उनकी रातों की नींद भी उड़ गई थी. अक्षत मंडल के चार बेटे केरल में काम करते हैं.
उनका एक बेटा सऊदी अरब में नौकरी करता है. केरल में रहने वाले बेटों ने 27 जनवरी को प्रस्तावित सुनवाई के लिए वापस लौटने के टिकट बुक कर लिए थे, लेकिन विदेश में रहने वाला बेटा इसमें शामिल नहीं हो पाएगा. स्थानीय पंचायत प्रधान महबूब इस्लाम ने आरोप लगाया कि नोटिस में बेटों की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी गई, जिससे मंडल की परेशानी बढ़ गई.
उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस तरह के मामलों में ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है. स्थानीय लोग SIR से जुड़े नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. युवा कांग्रेस के सचिव यूसुफ अली ने इस पूरे मामले को अमानवीय बताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है.
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