महाराष्ट्र के विधान भवन में बजट सत्र के दौरान सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है. फर्जी पास के जरिए अंदर प्रवेश करने की कोशिश का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे मामले ने विधान भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. खास बात यह है कि इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की भी संलिप्तता सामने आई है.
महाराष्ट्र विधान भवन में बजट सत्र के दौरान फर्जी पास का इस्तेमाल कर प्रवेश करने की कोशिश का मामला सामने आया. इस घटना के बाद हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो गईं. मामले की जानकारी मिलते ही जांच शुरू की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. पुलिस के मुताबिक, इस फर्जी पास का इस्तेमाल कर एक व्यक्ति को अंदर भेजने की योजना बनाई गई थी. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब विधान भवन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं। ऐसे में यह चूक बेहद गंभीर मानी जा रही है.
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी दत्तात्रय गुंजाल को यह फर्जी पास दिया गया था. हैरानी की बात यह है कि इस पास पर चीफ मिनिस्टर ऑफिस एडवाइजर लिखा हुआ था, जिससे उसे आसानी से अंदर प्रवेश मिल सकता था. यह पास देखने में पूरी तरह असली जैसा लग रहा था, जिससे शुरुआती स्तर पर किसी को शक नहीं हुआ. लेकिन जब विधान भवन पुलिस को इस पास पर संदेह हुआ, तब पूरे मामले की गहराई से जांच की गई. इसके बाद इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ.
इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में दो मंत्रालय के कर्मचारी और दो विधान भवन के कर्मचारी शामिल हैं, जो इसे और भी गंभीर बनाता है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केशव गुंजल (53), गणपत भाऊ जावले (50), नागेश शिवाजी पाटिल (42), मनोज आनंद मोरबले (40) और स्वप्निल रमेश तायडे (40) के रूप में हुई है. इन सभी ने मिलकर फर्जी पास तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने की साजिश रची थी. सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद प्रशासन भी सख्त हो गया है.
विधान भवन सिक्योरिटी और पुलिस की इंटरनल जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. जांच में सामने आया कि पास को गलत तरीके से तैयार कर सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की गई थी. इसके बाद विधान भवन प्रशासन ने इसकी शिकायत मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.
हालांकि अब तक की जांच में किसी तरह के पैसे के लेन-देन की बात सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस इस एंगल को भी खंगाल रही है. मरीन ड्राइव पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता हो सकती है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी पास बनाने के पीछे असली मकसद क्या था. इस घटना के बाद विधान भवन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
दीपेश त्रिपाठी