महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक चौंकाने वाला इंश्योरेंस फ्रॉड सामने आया है. जहां 50 लाख रुपये का इंश्योरेंस क्लेम हासिल करने के लिए एक व्यक्ति की मौत को फर्जी सड़क हादसा दिखाने की साजिश रची गई. पुलिस ने इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में चार पुलिसकर्मी और एक सरकारी मेडिकल ऑफिसर भी शामिल हैं. जांच में सामने आया कि सभी ने मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया, जिससे इंश्योरेंस कंपनी से मोटी रकम हासिल की जा सके. लेकिन कंपनी की जांच में साजिश का पूरा खेल उजागर हो गया.
चालीसगांव से खुला बड़ा फ्रॉड
यह पूरा मामला उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले के चालीसगांव इलाके से सामने आया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों ने एक व्यक्ति की मौत को सड़क दुर्घटना बताकर इंश्योरेंस कंपनी से 50 लाख रुपये का दावा करने की कोशिश की थी. इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और पूरा एक्सीडेंट का एक काल्पनिक घटनाक्रम बनाया गया. योजना इतनी बारीकी से बनाई गई थी कि पहली नजर में यह सामान्य दुर्घटना का मामला लग रहा था. लेकिन आगे की जांच में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने पूरे मामले की सच्चाई खोल दी.
पत्नी ने किया था इंश्योरेंस क्लेम
पुलिस के मुताबिक इस मामले में मृतक राजेंद्र शालिंदर जाधव की पत्नी अरुणा जाधव ने इंश्योरेंस क्लेम दाखिल किया था. अपने दावे में उसने बताया कि राजेंद्र मोटरसाइकिल से दहीवड से मालेगांव जा रहे थे. इसी दौरान एक एसयूवी ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी. हादसे में गंभीर रूप से घायल राजेंद्र को चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया. वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, ऐसा दावा किया गया था. इस कथित दुर्घटना के आधार पर मेहुणबारे पुलिस स्टेशन में मामला भी दर्ज कराया गया.
इंश्योरेंस कंपनी को हुआ शक
जब इंश्योरेंस कंपनी ने इस क्लेम की जांच शुरू की, तो कई गड़बड़ियां सामने आने लगीं. दस्तावेजों और घटनाक्रम में कई ऐसे विरोधाभास थे, जिन्होंने अधिकारियों को शक में डाल दिया. कंपनी के जांच अधिकारियों ने जब गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि कहानी में कई तथ्य मेल नहीं खा रहे थे. इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस ने जब स्वतंत्र जांच शुरू की तो यह मामला एक बड़े इंश्योरेंस फ्रॉड में बदल गया.
चौंक गए अधिकारी
जांच के दौरान पता चला कि राजेंद्र जाधव की मौत किसी सड़क हादसे में नहीं हुई थी. दरअसल उनकी मौत फरवरी 2024 में ही हो चुकी थी. यानी जिस हादसे का जिक्र किया गया था, वह पूरी तरह से फर्जी था. पुलिस के मुताबिक राजेंद्र की असली मौत गंभीर लीवर बीमारी के कारण हुई थी. इसके बावजूद आरोपियों ने दस्तावेजों में बदलाव कर उनकी मौत को सड़क दुर्घटना दिखाने की कोशिश की. इस खुलासे के बाद पूरा मामला संदिग्ध हो गया.
घर में लगी फोटो ने खोल दी पोल
जांच के दौरान एक और अहम सुराग सामने आया. पुलिस को मृतक के घर में रखी तस्वीर पर दर्ज तारीख मिली. उस फोटो पर 23 फरवरी 2024 को उनकी मौत की तारीख लिखी हुई थी. इससे साफ हो गया कि मौत एक साल पहले ही हो चुकी थी. इसके अलावा ग्राम पंचायत के रजिस्टर में भी उनकी मौत का रिकॉर्ड दर्ज नहीं था. इन तथ्यों ने यह साबित कर दिया कि दुर्घटना की कहानी पूरी तरह से गढ़ी गई थी.
कई कंपनियों से ली गई थीं पॉलिसियां
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि राजेंद्र जाधव के नाम पर करीब 10 अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों से पॉलिसियां ली गई थीं. इससे यह शक और गहरा हो गया कि यह पूरी योजना पहले से बनाई गई थी. आरोपियों का मकसद कई कंपनियों से अलग-अलग क्लेम लेकर करोड़ों रुपये हासिल करना था. इस तरीके से वे एक ही घटना को दिखाकर कई जगह से पैसा निकालने की कोशिश कर रहे थे.
चार पुलिसकर्मी और डॉक्टर भी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी अरुणा जाधव, उसके भाई मिथुन जाधव और चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर मंदार करमबलेकर को आरोपी बनाया है. इसके अलावा चार पुलिसकर्मी महेंद्र पाटिल, सुनील निकम, रवींद्र बटिसे और सचिन निकम भी इस साजिश में शामिल पाए गए. साथ ही दो इंश्योरेंस एजेंट प्रवीण पाटिल और प्रेम पाटिल को भी गिरफ्तार किया गया है. सभी आरोपियों को रविवार को हिरासत में लिया गया.
7.5 करोड़ रुपये की ठगी का प्लान
जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों की योजना सिर्फ 50 लाख रुपये तक सीमित नहीं थी. पुलिस के मुताबिक इसी तरीके से कई इंश्योरेंस कंपनियों से करीब 7.5 करोड़ रुपये का क्लेम हासिल करने की तैयारी थी. लेकिन इंश्योरेंस कंपनी के एक अधिकारी की सतर्कता ने इस बड़े फ्रॉड को समय रहते पकड़ लिया. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था.
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