गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-3 थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया. चोरी के महज शक में कुछ दबंग युवकों ने नाबालिग बच्चों के साथ ऐसी हैवानियत की, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. देर रात वहां बर्बरता का तांडव चला. पीड़ितों में 4 से 5 नाबालिग बच्चे हैं, जिनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे ऐसी जगह मौजूद थे, जहां कुछ सामान चोरी हुआ था. इसके बाद बेखौफ आरोपियों ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं.
PG के अंदर बंधक बनाए गए मासूम
मामला डीएलएफ फेज-3 थाना क्षेत्र के यू-ब्लॉक स्थित U-59 पीजी का है. पुलिस के अनुसार, आधा दर्जन युवक नशे की हालत में U-59 पीजी में मौजूद थे. जहां चोरी के शक के नाम पर उन्होंने नाबालिग बच्चों को जबरन कमरे में बंद कर दिया. बच्चों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया और उन पर अमानवीय अत्याचार किए गए. किसी को लाठी-डंडों से पीटा गया तो किसी को डराया गया. बच्चे लगातार रोते-गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन आरोपियों का दिल नहीं पसीजा. PG के भीतर चल रही चीख-पुकार किसी को सुनाई नहीं दी.
गर्म चम्मच और पेट्रोल से टॉर्चर
जांच में सामने आया है कि बच्चों को शारीरिक रूप से बहुत यातना दी गई. किसी नाबालिग के शरीर पर गर्म चम्मच से दागा गया, तो किसी के गुप्तांग में पेट्रोल डालकर मारपीट की गई. बच्चों के हिप्स और संवेदनशील अंगों पर भी गर्म चम्मच से जलाने के निशान मिले हैं. इसके बाद भी आरोपियों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई जारी रखी. नशे में धुत दबंगों को जरा भी रहम नहीं आया.
मां के सामने बच्चों पर जुल्म
इस खौफनाक वारदात का पर्दाफाश तब हुआ, जब एक नाबालिग बच्चे की मां अपने बेटे को तलाशते हुए U-59 पीजी पहुंची. मां ने जैसे ही बच्चों को बंधक हालत में देखा, वह रोते हुए उन्हें छोड़ने की गुहार लगाने लगी. लेकिन दबंग यहीं नहीं रुके. उन्होंने मां को भी बंधक बना लिया और उसके सामने ही उसके बेटे को टॉर्चर करने लगे. मां की चीखें और बेबसी वहां मौजूद दरिंदों को भी नहीं रोक सकीं. यह मंजर किसी भी इंसान को भीतर से तोड़ देने वाला था.
पीड़ित बच्चे अस्पताल में भर्ती
घटना की सूचना मिलते ही गुरुग्राम पुलिस हरकत में आई और मौके पर पहुंची. सभी नाबालिग बच्चों और उनकी मां को तुरंत गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, हालांकि वे खतरे से बाहर हैं. अस्पताल में सभी पीड़ित बच्चों का मेडिकल एग्जामिनेशन कराया गया. शरीर पर मौजूद जख्म और जलने के निशान वारदात की कहानी बयान कर रहे हैं. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच को और तेज कर दिया है.
सरिए की चोरी का शक बना वजह
शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि पीजी संचालकों की कंस्ट्रक्शन साइट से कुछ लोहे के सरिए के टुकड़े गायब हो रहे थे. बस इसी शक के आधार पर आरोपियों ने बच्चों को चोर मान लिया. बिना किसी सबूत के उन्होंने कानून हाथ में ले लिया. नाबालिग बच्चों को सजा देने का फैसला खुद कर लिया गया. यही शक धीरे-धीरे बर्बरता में बदल गया. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी वास्तव में हुई थी या नहीं.
दो आरोपी गिरफ्तार
गुरुग्राम पुलिस के डीसीपी ईस्ट गौरव राजपूत ने टेलीफोनिक बातचीत में घटना की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि नाबालिग बच्चों को बंधक बनाकर उनके साथ गंभीर हैवानियत की गई. पुलिस ने मौके से दो आरोपियों हरिंदर और फिरोज को गिरफ्तार कर लिया है. अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. बच्चों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं. पुलिस का दावा है कि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी.
(गुरुग्राम से नीरज का इनपुट)
aajtak.in