हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में पूर्व कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर पर हुए जानलेवा हमले के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. इस मामले का आरोपी अजय पुलिस हिरासत से फरार हो गया. आरोपी के भागने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले में ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.
पुलिस के अनुसार, बंबर ठाकुर पर पिछले साल हुए फायरिंग हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल अजय पुलिस की हिरासत से भाग निकला. वह अदालत में पेशी के बाद वापस लाया जा रहा था. आरोपी के फरार होने की घटना 15 मई को दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास टिकरी इलाके में हुई थी. हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि गुरुवार को की.
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप धावल ने बताया कि आरोपी को अदालत में पेशी के लिए दिल्ली ले जाया गया था. सुनवाई पूरी होने के बाद पुलिस टीम उसे बस के जरिए वापस बिलासपुर जेल ला रही थी. इसी दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया. घटना के बाद उसकी तलाश के लिए कई टीमें सक्रिय कर दी गई हैं.
पुलिस ने आरोपी के फरार होने को गंभीर लापरवाही माना है. आरोपी के साथ ड्यूटी पर मौजूद बिलासपुर पुलिस के दो कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों कांस्टेबलों और आरोपी अजय के बीच काफी नजदीकी हो गई थी. बताया जा रहा है कि दोनों पुलिसकर्मी आरोपी के घर भी जा चुके थे. इसी वजह से जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं आरोपी के फरार होने में किसी प्रकार की मदद तो नहीं मिली.
आरोपी को पकड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा पुलिस मिलकर अभियान चला रही है. विभिन्न स्थानों पर उसकी तलाश की जा रही है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए राज्यों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है.
पीटीआई के अनुसार, यह मामला पिछले साल होली के दौरान हुए हमले से जुड़ा है. उस समय चार हमलावरों ने बिलासपुर स्थित उनकी पत्नी के सरकारी आवास पर पूर्व कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. इस हमले में बंबर ठाकुर के पैर में गोली लगी थी, जबकि उनके निजी सुरक्षा अधिकारी संजीव कुमार को कई गोलियां लगी थीं.
हमले के बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 3(5) (एक से अधिक लोगों द्वारा आपराधिक कृत्य) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत केस दर्ज किया गया था. इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें फरार हुआ आरोपी अजय भी शामिल था.
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