DSEU यौन उत्पीड़न केस: कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज, यूनिवर्सिटी पर लगे गंभीर आरोप

DSEU से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है. महिला लेक्चरर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज की है. सैलरी में देरी, प्रशासनिक दबाव और सर्विस रिकॉर्ड से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है.

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DSEU के वाइस चांसलर अशोक नागवत ने आरोपों को खारिज कर दिया है. (Photo: dseu.ac.in) DSEU के वाइस चांसलर अशोक नागवत ने आरोपों को खारिज कर दिया है. (Photo: dseu.ac.in)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. यह कार्रवाई दिल्ली की द्वारका कोर्ट के आदेश के बाद की गई है. महिला लेक्चरर की शिकायत पर द्वारका साउथ थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. शिकायतकर्ता लेक्चरर ने यौन उत्पीड़न, प्रशासनिक प्रताड़ना और सर्विस रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

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पुलिस के मुताबिक, इस मामले में FIR 7 जनवरी को कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई. महिला का आरोप है कि यूनिवर्सिटी द्वारा सैलरी वितरण की जिम्मेदारी संभालने के बाद से उसके वेतन में बार-बार देरी होने लगी. इस देरी के चलते उसे आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा और वह अपने लोन की किश्तें समय पर नहीं चुका पाई, जिस पर पेनल्टी भी लगी. इस दौरान वो मानसिक रूप से परेशान रही.

7 जनवरी को दिए आदेश में द्वारका कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया था. पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत केस दर्ज किया है, जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़ी है. इसके साथ ही धारा 34 यानी सामान्य इरादे की धाराएं भी लगाई गई हैं.

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महिला लेक्चरर ने शिकायत में बताया कि वह 20 साल से अधिक की सेवा वाली एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं. अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच जब वह अपनी बकाया सैलरी और लंबित रीइम्बर्समेंट के लिए यूनिवर्सिटी के चक्कर लगा रही थीं, तब उन्हें बार-बार उत्पीड़न झेलना पड़ा. शिकायत के मुताबिक फरवरी 2024 में उन्होंने पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन तब कोई मामला दर्ज नहीं किया गया. 

इसके बाद अप्रैल 2024 में यूनिवर्सिटी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया, जिसे उन्होंने शिकायत करने के बदले की कार्रवाई बताया. हालांकि, एक आंतरिक जांच के बाद 1 अक्टूबर 2024 को उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया गया. FIR में एक अहम आरोप उनकी पर्सनल फाइल और सर्विस बुक से जुड़ा है. लेक्चरर का दावा है कि जब वह ये दस्तावेज लेने यूनिवर्सिटी कैंपस गईं, तो उन्हें रिकॉर्ड फटे और खराब हालत में मिले. 

रिकॉर्ड्स को और नुकसान होने की आशंका के चलते उन्होंने पुलिस को बुलाया. महिला का आरोप है कि सीनियर अधिकारियों ने उन पर खराब रिकॉर्ड्स को स्वीकार करने का दबाव बनाया. उनसे कहा गया कि यदि वह शिकायतें करती रहीं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने DSEU अधिकारियों पर आपराधिक साजिश, डराने-धमकाने और सरकारी संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए हैं.

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वहीं DSEU के वाइस चांसलर अशोक नागवत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होने की जानकारी है, लेकिन यह शिकायत दबाव बनाने के मकसद से की गई है. उनके मुताबिक यूनिवर्सिटी इस आदेश के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर करेगी और जरूरत पड़ने पर मानहानि का केस भी दाखिल किया जा सकता है. फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

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