उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में साल 2020 में लगी आग की एक घटना ने अब सनसनीखेज मोड़ ले लिया है. करीब पांच साल बाद आई DNA रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जिस आग को हादसा समझकर फाइल बंद कर दी गई थी, वह दरअसल एक जघन्य हत्या थी. पुलिस ने अब इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 20 दिसंबर 2020 की सुबह रोजा इलाके की एक दुकान में आग लगने की सूचना मिली थी. मौके से जले हुए अवशेष बरामद हुए, जिन्हें उस समय पुलिस ने जानवरों के अवशेष मान लिया था. इन्हें एक बोरी में भरकर ठिकाने भी लगा दिया गया. कुछ समय बाद एक पशु चिकित्सक ने अवशेषों की जांच की थी.
उन्होंने बताया कि अवशेष जानवरों के नहीं, बल्कि इंसान के हैं. इसके बाद पोस्टमॉर्टम कराया गया. घटनास्थल से एक मेटल ब्रेसलेट और बेल्ट के कुछ टुकड़े भी मिले थे. इसके बाद में इन सामानों की पहचान अभिषेक यादव के परिवार ने की, जो उसी रात से लापता था.परिजनों ने 21 फरवरी 2021 को राम चंद्र मिशन थाना में गुमशुदगी दर्ज कराई थी.
पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी के मुताबिक, पुलिस ने पहचान पुख्ता करने के लिए अभिषेक के माता-पिता के DNA सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे. लगातार रिमाइंडर के बाद मंगलवार को DNA रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि जली हुई लाश का DNA अभिषेक के माता-पिता से मेल खाता है. इससे साफ हो गया कि आग की घटना में युवक की हत्या की गई थी.
पीड़ित की मां की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 19 दिसंबर 2020 की रात अभिषेक खाना खाने एक होटल गया था. वहां उसकी नईम, राजू और एक पिकअप ड्राइवर से कहासुनी हो गई. आरोप है कि बाद में इन लोगों ने अभिषेक को दुकान के अंदर बंद करके आग लगा दी. पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है.
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