14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए MCD रिश्वत कांड के आरोपी डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा

दिल्ली MCD के शाहदरा नॉर्थ जोन के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा और अधिकारी दिव्यांशु गौतम को CBI ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है. बुधवार को कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है. जानें दोनों अफसरों की करतूत.

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अदालत ने दोनों अफसरों को 14 दिन के लिए जेल भेजा है (फोटो-ITG) अदालत ने दोनों अफसरों को 14 दिन के लिए जेल भेजा है (फोटो-ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

दिल्ली नगर निगम में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शाहदरा नॉर्थ जोन के डिप्टी कमिश्नर कर्नल अभिषेक कुमार मिश्रा और उनके सहयोगी एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर दिव्यांशु कुमार गौतम को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस मामले की सुनवाई के बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है. कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. 

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इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि दोनों ने एक व्यक्ति से करीब चार लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी. शिकायत मिलने के बाद CBI ने पहले से ही जाल बिछाया और पूरी योजना के तहत दोनों अधिकारियों को रंगेहाथ पकड़ लिया. गिरफ्तारी के बाद दोनों को एक दिन की CBI हिरासत में रखा गया, जहां उनसे लंबी पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिससे केस और मजबूत हुआ है.

CBI हिरासत पूरी होने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ पूरी हो चुकी है और मामले से जुड़े पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए हैं. अदालत ने इस आधार पर दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया. इसके बाद दोनों को तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया. कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी. इस केस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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इस पूरे मामले में एक और बड़ा खुलासा पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल की रिपोर्ट से हुआ है. कोर्ट में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया कि अवैध निर्माण के मामलों में बड़ी लापरवाही बरती गई. जिन दुकानों को अवैधता के आधार पर सील किया गया था, उन्हें अधिकारियों की मिलीभगत से दोबारा खोल दिया गया. इतना ही नहीं, कई मामलों में आदेश और नोटिस के बावजूद अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. 

पूर्व मेयर के अनुसार, यह भ्रष्टाचार सिर्फ कुछ अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक फैला हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ठेकेदारों और बिल्डरों से मिलकर अवैध कामों को बढ़ावा देते हैं और बदले में मोटी रकम वसूलते हैं. इस तरह के आरोपों ने पूरे नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क का खुलासा हो सकता है. इससे आम जनता का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है.

CBI को इस रिश्वत मांगने के मामले की पहले से ही गोपनीय सूचना मिल गई थी. इसके बाद एजेंसी ने रणनीति बनाकर ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया और दोनों अधिकारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. अब आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है. यह मामला न केवल MCD बल्कि पूरे सरकारी तंत्र के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आया है. आने वाले दिनों में इस केस की जांच और भी अहम मोड़ ले सकती है.

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