सात साल का अगवा मासूम बच्चा बरामद, मां के पूर्व लिवइन पार्टनर ने किया था अपहरण, हैरान कर देगी वजह

पुलिस के मुताबिक, मोबाइल रिपेयर का काम करने वाले अजय वर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर उस महिला के 7 वर्षीय बेटे का अपहरण करने की साजिश रची ताकि वो महिला के साथ फिर से रिश्ता शुरू कर सके.

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पुलिस ने अगवा किए गए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया (फोटो-ChatGPT) पुलिस ने अगवा किए गए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया (फोटो-ChatGPT)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे मासूम बच्चे को रेस्क्यू किया है, जिसे अगवा कर लिया गया था. हैरानी की बात ये है कि उस बच्चे का अपहरण फिरौती के लिए नहीं बल्कि उसकी मां को हासिल करने के लिए किया गया था. इस मामले का खुलासा करने वाली पुलिस भी आरोपी के मकसद को जानकर हैरान है. चलिए आपको बताते हैं, इस अपहरण कांड की पूरी कहानी.

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इस वारदात में एक सात साल का मासूम बच्चा है. उसकी मां है. और है मां का पूर्व लिव-इन पार्टनर. पुलिस ने अपहरण के इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया है.

दरअसल, पुलिस ने बताया कि एक शादीशुदा महिला अपने बेटे को साथ लेकरस एक शख्स के साथ लिव इन में रह रही थी. वो हरियाणा के हांसी में 24 वर्षीय अजय वर्मा के साथ रह रही थी, लेकिन कुछ दिनों में ही उनके रिश्ते में दरार आ गई. नतीजा ये हुआ कि अजय वर्मा का व्यवहार बदलता गया और हिंसा बढ़ती गई. इसी बात से परेशान होकर उस महिला ने अजय से रिश्ता तोड़ दिया और अपने बेटे को साथ लेकर दिल्ली में अपने माता-पिता के घर चली गई.

उसके लौट जाने से अजय वर्मा परेशान हो गया. उसे अहसास होने लगा कि वो उस महिला के बिना नहीं रह सकता. वो उसे मनाने की कोशिश करता रहा. लेकिन महिला नहीं मानी. बस यहीं से अजय का दिमाग बहक गया. फिर मोबाइल रिपेयर का काम करने वाले अजय ने अपने साथियों के साथ मिलकर उस महिला के 7 वर्षीय बेटे का अपहरण करने की साजिश रची ताकि वो महिला के साथ फिर से रिश्ता शुरू कर सके.

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इस काम में उसका साथ उसके दो दोस्तों ने दिया. जिनकी पहचान टेंट हाउस में काम करने वाले 18 वर्षीय अमित, पीवीसी फैक्ट्री में काम करने वाले 20 वर्षीय सचिन और सफाई कर्मचारी 20 वर्षीय अजय के रूप में हुई है. अमित और सचिन हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं, जबकि अजय दिल्ली के विकासपुरी का रहने वाला है.

पुलिस के अनुसार, बच्चे की मां ने 28 सितंबर को विकासपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका बेटा पिछले दिन स्कूल से घर नहीं लौटा था और उसने अजय वर्मा पर शक जताते हुए कहा कि उसके बेटे का अपहरण करने के पीछे अजय हो सकता है. पुलिस ने फौरन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू की.

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) शरद भास्कर दराडे ने पीटीआई से कहा कि पुलिस टीम ने स्कूल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की और पाया कि दो लोगों ने मोटरसाइकिल पर बच्चे का अपहरण किया था. आरोपियों द्वारा बार-बार मोबाइल फोन बंद करने के बावजूद, पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सोशल मीडिया निगरानी के माध्यम से उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी.

इसी दौरान दिल्ली के विकासपुरी में रहने वाले अजय नामक एक आरोपी का जल्द ही पता चल गया और उससे पूछताछ की गई. उसने खुलासा किया कि वर्मा ने सोशल मीडिया के ज़रिए उससे संपर्क किया था और उसे बंदूक का इंतज़ाम करने को कहा था. डीसीपी ने बताया कि सुराग के आधार पर पुलिस ने हांसी के एक खेत पर ध्यान केंद्रित किया, जहां अजय वर्मा बच्चे को लेकर अपने दो साथियों के साथ छिपा हुआ था.

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डीसीपी के मुताबिक, पुलिस की टीम ने वहां छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप सात साल के बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया और अजय वर्मा के साथ अमित और सचिन को भी गिरफ्तार कर लिया गया. एक साथ की गई इस कार्रवाई के दौरान अजय को विकासपुरी में मौजूद उसके घर से गिरफ्तार किया गया और उसके पास से एक पिस्तौल जब्त की गई. 

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) शरद भास्कर दराडे ने आगे बताया कि अजय वर्मा के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि सचिन के अलावा, जिसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत पहले भी एक मामला दर्ज है, बाकी आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है.

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