केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को बेंगलुरु में बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (CPRI) के इंजीनियरिंग अधिकारी ग्रेड-4 राजाराम मोहनराव चेनू को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी 9.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के दौरान की गई, जिससे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया. CBI अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट की टेस्ट रिपोर्ट में गड़बड़ी से जुड़ा है. जांच एजेंसी ने पहले से इस सौदे की जानकारी जुटा रखी थी. FIR दर्ज होने के बाद जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ा गया. इस कार्रवाई को CBI की बड़ी सफलता माना जा रहा है.
रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
CBI के प्रवक्ता ने बताया कि 9 जनवरी 2026 को बेंगलुरु में जॉइंट डायरेक्टर राजाराम चेनू को एक निजी कंपनी के अधिकारी के साथ रिश्वत की रकम का लेन-देन करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया. यह रकम कुल 9.5 लाख रुपये थी. CBI ने पहले ही मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रैप प्लान किया था. जैसे ही रिश्वत की राशि दी जा रही थी, टीम ने मौके पर दबिश दी. इस दौरान निजी कंपनी का एक एग्जीक्यूटिव भी गिरफ्तार किया गया. पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई.
तलाशी में करोड़ों की रकम बरामद
गिरफ्तारी के बाद CBI ने राजाराम चेनू के आवास पर छापेमारी की, जहां से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई. अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान 3.59 करोड़ रुपये से अधिक की भारतीय मुद्रा मिली. इसके अलावा बड़ी मात्रा में विदेशी करेंसी भी जब्त की गई. शुरुआती आकलन में यह बरामदगी आय से अधिक संपत्ति की ओर इशारा करती है. CBI ने इस बरामद नकदी को जब्त कर लिया है. फिलहाल तलाशी अभियान जारी है और और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
विदेशी मुद्रा का बड़ा जखीरा
CBI को छापेमारी के दौरान सिर्फ भारतीय नकदी ही नहीं, बल्कि कई देशों की विदेशी मुद्रा भी मिली है. इनमें अमेरिकी डॉलर, हांगकांग डॉलर, सिंगापुर डॉलर, इंडोनेशियन रुपिया, मलेशियन रिंगिट, यूरो, चीनी युआन, स्वीडिश क्रोना और यूएई दिरहम शामिल हैं. इन विदेशी मुद्राओं की कुल कीमत 4 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है. इतनी विविध विदेशी करेंसी मिलने से जांच एजेंसी को संदेह है कि भ्रष्टाचार का नेटवर्क काफी व्यापक हो सकता है. CBI अब विदेशी लेन-देन के एंगल से भी जांच कर रही है.
फेवर रिपोर्ट के बदले रिश्वत
PTI के मुताबिक, आरोप है कि राजाराम चेनू निजी कंपनी ‘सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज’ को फायदा पहुंचाने के लिए भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल था. वह कंपनी द्वारा बनाए गए इलेक्ट्रिकल उपकरणों की टेस्ट रिपोर्ट के बदले रिश्वत ले रहा था. जांच में सामने आया है कि फेवर रिपोर्ट जारी करने के लिए लगातार पैसे वसूले जा रहे थे. इसी मामले में कंपनी के डायरेक्टर अतुल खन्ना को भी गिरफ्तार किया गया है. CBI को शक है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था. अब सभी वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है.
..और खुलासों की उम्मीद
CBI अधिकारियों ने साफ किया है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. प्रवक्ता के अनुसार, अब तक कुल करीब 3.76 करोड़ रुपये की नकदी (विदेशी मुद्रा सहित) बरामद हो चुकी है. एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार से जुड़े और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं. CPRI जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के आरोपों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल आरोपी CBI की हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है.
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