दिल्ली की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार आर्मी ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक ऐसे संवेदनशील पद पर तैनात था, जो देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है.
स्पेशल जज गगनदीप सिंह ने 23 जनवरी के आदेश में अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि दीपक कुमार शर्मा रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग में उप योजना अधिकारी (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निर्यात) के पद पर कार्यरत थे. इस भूमिका में उन्हें बेहद अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं.
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप काफी गंभीर प्रकृति के हैं. ऐसे मामलों में, जब जांच शुरुआती चरण में हो, तो आरोपी के द्वारा जांच या गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था.
आरोप है कि दीपक कुमार शर्मा ने दुबई स्थित एक कंपनी से 3 लाख रुपए की रिश्वत ली. इस मामले में उनकी पत्नी कर्नल काजल बाली को भी आरोपी बनाया गया है. वो राजस्थान के श्रीगंगानगर में 16 इन्फैंट्री डिवीजन ऑर्डनेंस यूनिट की कमांडिंग ऑफिसर हैं. इस मामले में उनकी भी संलिप्तता पाई गई है.
CBI के एक अधिकारी के मुताबिक, दीपक कुमार शर्मा रक्षा उत्पादों के निर्माण, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़ी निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आपराधिक साजिश में शामिल थे. आरोप है कि वे अपने सरकारी पद का दुरुपयोग कर कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाते थे. इसके बदले रिश्वत लेते थे.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि दुबई की कंपनी M/s DP World से संभावित रिश्वत भुगतान को लेकर इनपुट मिले थे. कंपनी के भारत संचालन का जिम्मा बेंगलुरु से राजीव यादव और रवजीत सिंह संभाल रहे थे. दोनों दीपक कुमार शर्मा से लगातार संपर्क में थे.
आरोप है कि एक साजिश के तहत इन लोगों ने विभिन्न सरकारी विभागों से मंजूरी और लाभ लेने के लिए दीपक कुमार शर्मा की मदद ली. कोर्ट ने दीपक शर्मा के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि कंपनी के कंसाइनमेंट की मंजूरी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी.
कोर्ट ने कहा कि केस डायरी और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत साफ तौर पर दिखाते हैं कि आरोपी रक्षा निर्यात से जुड़े सामान को आर्मेनिया भेजने की मंजूरी प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल था. वह ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और DGCA जैसे विभागों के साथ समन्वय कर रहा था.
सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि 18 दिसंबर को आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. इस दौरान 3 लाख रुपए की रिश्वत की रकम, 2.23 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेहिसाब नकदी, विदेशी मुद्रा और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया गया. आरोपी की पत्नी के घर से भी 10 लाख नकद मिले थे.
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