पुणे में ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर बड़ा खेल, कारोबारी से ₹7 करोड़ से ज्यादा की ठगी

पुणे में एक कारोबारी को टेलीग्राम के जरिए ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का शिकार बनाया गया. पुलिस ने इस मामले में बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जानें पूरा मामला.

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इस मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है (फोटो-ITG) इस मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है (फोटो-ITG)

ओमकार

  • पुणे,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

पुणे में ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां कोंढवा इलाके में रहने वाले 53 वर्षीय कारोबारी ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके साथ 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई है. आरोप है कि साइबर अपराधियों ने टेलीग्राम के जरिए संपर्क कर उन्हें भारी मुनाफे का लालच दिया. इसके बाद कारोबारी को ऑनलाइन करेंसी ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए तैयार किया गया. पुलिस के मुताबिक, यह ठगी कई महीनों तक योजनाबद्ध तरीके से चलती रही. इस मामले की जांच अब पुणे साइबर पुलिस कर रही है.

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जांच अधिकारियों के अनुसार, कारोबारी से पहली बार अक्टूबर 2025 में टेलीग्राम पर संपर्क किया गया था. आरोपियों ने खुद को निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर भरोसा जीता. इसके बाद उन्होंने कारोबारी को ‘PU Prime’ नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लिंक भेजा और उस पर अकाउंट बनाने को कहा. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी साझा की. कारोबारी को बताया गया कि इन खातों में पैसा ट्रांसफर करने पर ट्रेडिंग शुरू होगी और कुछ ही समय में मोटा मुनाफा मिलेगा. शुरुआत में आरोपी लगातार भरोसा दिलाते रहे कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है.

पुलिस के मुताबिक, कारोबारी ने 10 अक्टूबर 2025 से लेकर 4 अप्रैल 2026 के बीच कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 7,07,61,876 रुपये ट्रांसफर किए. हर बार आरोपी उन्हें ज्यादा रिटर्न और बड़े मुनाफे का झांसा देते रहे. शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि निवेश पर अच्छा फायदा मिलेगा, लेकिन लंबे समय तक पैसा लगाने के बावजूद उन्हें कोई लाभ नहीं मिला. जब कारोबारी ने रकम वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने बहाने बनाने शुरू कर दिए. बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वह बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं.

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इस मामले में डीसीपी विवेक मसल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. साइबर पुलिस अब टेलीग्राम अकाउंट, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी में किया गया. अधिकारियों का कहना है कि आरोपी संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं, फिलहाल मामले की जांच जारी है.

पुणे में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में लगातार तेजी देखी गई है. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में शहर में 357 साइबर अपराध दर्ज हुए थे. इसके बाद 2023 में यह संख्या बढ़कर 487 पहुंच गई. वहीं 2024 में साइबर क्राइम के मामलों में बड़ा उछाल आया और कुल 1,504 मामले दर्ज किए गए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में लोगों को किसी भी अनजान लिंक, निवेश ऑफर या टेलीग्राम ग्रुप पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी गई है.

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