हरियाणा में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट को देखते हुए राज्य पुलिस ने एक बड़ा अभियान चलाया. यह अभियान पूरे एक महीने तक चला और इसका मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी और अपराध पर लगाम लगाना था. इस विशेष ड्राइव को हरियाणा पुलिस ने सिलसिलेवार तरीके से अंजाम दिया. अभियान के दौरान सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की लगातार मॉनिटरिंग की गई. अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से राज्य में डिजिटल अनुशासन को मजबूती मिली है.
आईटी मंत्रालय के साथ समन्वय
इस विशेष अभियान को केंद्र सरकार के सहयोग से चलाया गया. राज्य पुलिस ने यह अभियान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर पूरा किया. दोनों एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के कारण कार्रवाई तेज और प्रभावी रही. अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए यह समन्वय बेहद जरूरी था. इस संयुक्त प्रयास से कई संदिग्ध लिंक और प्रोफाइल की पहचान हो सकी.
2000 से ज्यादा आपत्तिजनक लिंक चिन्हित
अभियान के दौरान साइबर टीमों ने 2,052 लिंक और प्रोफाइल चिन्हित किए. इन लिंक में भ्रामक, उकसाने वाला और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कंटेंट पाया गया. साइबर मॉनिटरिंग टीम ने हर लिंक की जांच की और प्लेटफॉर्म को रिपोर्ट भेजी. इस कार्रवाई से साफ संकेत गया कि सरकार ऑनलाइन गलत गतिविधियों को लेकर गंभीर है. पुलिस ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी आगे भी जारी रहेगी.
1616 लिंक हटाए, 436 की समीक्षा
रिपोर्ट किए गए 2,052 लिंक में से 1,616 को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हटा दिया या ब्लॉक कर दिया है. बाकी 436 लिंक अभी समीक्षा के दायरे में हैं. पुलिस लगातार प्लेटफॉर्म पर दबाव बना रही है कि जल्द से जल्द इन पर भी कार्रवाई हो. अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत यह काम किया जा रहा है. इससे ऑनलाइन अफवाहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
आईटी एक्ट के तहत नोटिस जारी
अधिकारियों ने बताया कि अवैध कंटेंट होस्ट करने वाले प्लेटफॉर्म को आईटी कानून के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं. विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत कार्रवाई की जा रही है. इस प्रावधान के तहत प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए जाते हैं. पुलिस का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सख्त, पारदर्शी और तय समयसीमा के भीतर पूरी की जा रही है.
फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स पर शिकंजा
सोशल मीडिया कंटेंट के साथ-साथ फर्जी निवेश और ट्रेडिंग ऐप्स के खिलाफ भी मोर्चा खोला गया. 12 जनवरी 2026 से शुरू हुए इस ऑपरेशन में कई संदिग्ध ऐप्स की पहचान की गई. जांच में पाया गया कि ये ऐप्स लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहे थे. पुलिस ने डिजिटल फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए अलग टीम बनाई. इस कदम को निवेश धोखाधड़ी रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
125 संदिग्ध ऐप्स की पहचान
जांच के दौरान कुल 125 संदिग्ध ऐप्स और चैनल सामने आए. इनमें से 88 को हटा दिया गया है. शेष 37 ऐप्स अंतिम समीक्षा में हैं और उन्हें भी जल्द हटाने की प्रक्रिया जारी है. पुलिस का कहना है कि इन ऐप्स के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाया जा रहा था. इस कार्रवाई से हजारों नागरिकों को संभावित नुकसान से बचाया गया है.
डीजीपी अजय सिंघल का सख्त संदेश
इस पूरे अभियान की निगरानी राज्य के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के निर्देशन में की गई. डीजीपी ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी और भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग सामाजिक शांति के लिए खतरा बन सकता है. उनका कहना है कि कानून के दायरे में रहकर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
भड़काऊ कंटेंट पर जीरो टॉलरेंस
डीजीपी ने दोहराया कि पुलिस की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है. जो लोग जानबूझकर अफवाह या संवेदनशील सामग्री फैलाते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि एक पोस्ट भी समाज में तनाव पैदा कर सकती है. इसलिए नागरिकों को जिम्मेदारी से डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए. पुलिस का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.
नागरिकों के लिए जरूरी सलाह
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. किसी भी ऐप या प्लेटफॉर्म में निवेश से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें. अपुष्ट या संवेदनशील जानकारी को शेयर करने से बचें. अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत अधिकारियों को सूचित करें. इन सावधानियों से साइबर ठगी से बचाव संभव है.
इबर फ्रॉड की तुरंत रिपोर्ट करें
अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध की स्थिति में देरी न करें. तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या शिकायत दर्ज करें. राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है. समय पर रिपोर्ट करने से फर्जी ट्रांजैक्शन को फ्रीज करने में मदद मिलती है. इससे कानूनी कार्रवाई भी तेज होती है.
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर
1,600 से अधिक आपत्तिजनक लिंक हटाने और दर्जनों फर्जी ऐप्स बंद कराने के बाद यह अभियान एक निर्णायक कदम माना जा रहा है. हरियाणा पुलिस का यह प्रयास डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करता है. अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे भी निगरानी जारी रहेगी. इस पहल से राज्य में एक सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार हुआ है.
अमन भारद्वाज