WhatsApp कॉल, फर्जी वारंट और डिजिटल अरेस्ट... 100 करोड़ की ठगी की साजिश बेनकाब

ऑनलाइन डर और मानसिक दबाव के जरिए लोगों को ठगने वाले डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है. दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इस हाई-प्रोफाइल रैकेट के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि एक ही अकाउंट से 190 शिकायतें और करीब 100 करोड़ रुपए की ठगी जुड़ी है.

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पुलिस ने दो आरोपियों अनीश सिंह और मणि सिंह को गिरफ्तार किया है. (Photo: X/@CrimeBranchDP) पुलिस ने दो आरोपियों अनीश सिंह और मणि सिंह को गिरफ्तार किया है. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट स्कैम का पर्दाफाश किया है. इस मामले में दो मुख्य आरोपियों अनीश सिंह और मणि सिंह को गिरफ्तार किया गया है, जो ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक धोखाधड़ी के जरिए लोगों को डराकर करोड़ों रुपए की ठगी कर रहे थे.

पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह स्कैम सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि गहरे मानसिक उत्पीड़न पर आधारित था. पीड़ितों को कानून, गिरफ्तारी और बदनामी का डर दिखाकर महीनों तक डिजिटल अरेस्ट किया जाता था. इसी तरीके से एक महिला को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया.

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इस दौरान उसकी जीवनभर की 40 लाख रुपए की बचत आरोपियों ने अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा ली. 15 अक्टूबर 2025 से 12 दिसंबर 2025 के बीच पीड़िता को लगातार धमकियों, वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मानसिक रूप से तोड़ा गया. आरोपी ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया.

उसने आधार कार्ड के डिटेल के दुरुपयोग का आरोप लगाया. पीड़िता को गिरफ्तार करने की चेतावनी दी. इसके बाद कॉल को एक महिला ‘अधिकारी’ को ट्रांसफर किया गया, जिसने WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए फर्जी FIR, जाली गिरफ्तारी वारंट और पूरे परिवार को फंसाने की धमकियां दी. 

पीड़िता को साफ निर्देश दिए गए कि वो किसी से बात न करे और रोजाना उनसे संपर्क करे. डर और मानसिक दबाव के माहौल में पीड़िता से किस्तों में 40 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए. हर ट्रांजैक्शन के बाद उसे चैट, कॉल लॉग और पेमेंट से जुड़े डिजिटल सबूत मिटाने के निर्देश दिए जाते थे. 

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इसके बावजूद आरोपी रिफंड और वेरिफिकेशन के नाम पर मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखते रहे. आखिरकार पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद E-FIR नंबर 60001703/2025 दर्ज की गई. जांच साइबर सेल के इंस्पेक्टर संदीप सिंह को सौंपी गई. उन्हें हेड कांस्टेबल अक्षय कुमार का सहयोग मिला.

पुलिस की जांच के दौरान कई राज्यों में फैले शेल अकाउंट और UPI आईडी का जाल सामने आया. फंड ट्रेल की गहराई से जांच में मेसर्स वृंदाकार्ट स्काईलाइन शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रजिस्टर्ड एक बैंक अकाउंट का पता चला, जो पश्चिम दिल्ली के न्यू महावीर नगर से संचालित हो रहा था.

जांच में लेयर-1 से लेयर-4 तक फंड मूवमेंट सामने आया. NCRP पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, इस एक अकाउंट से जुड़े 190 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की रकम शामिल है. पूछताछ में आरोपियों ने कंपनी के नाम पर 8 बैंक अकाउंट खोले जाने की बात कबूल की है.

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