दिल्ली में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने गोविंदपुरी इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो मिलकर लोगों को ऑनलाइन जाल में फंसा रहे थे. ये गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाता था और धीरे-धीरे उनसे पैसे ऐंठता था. पुलिस की इस रेड ने राजधानी में फैल रहे साइबर अपराध के एक और खतरनाक नेटवर्क को उजागर कर दिया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुका था.
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरुग्राम के एक व्यक्ति ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित ने बताया कि उसके साथ ₹13,200 की ठगी हुई है. शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और ट्रांजैक्शन डिटेल्स खंगालनी शुरू कर दीं. जांच के दौरान एक ऐसे बैंक अकाउंट का पता चला, जिसमें अलग-अलग राज्यों से ठगी का पैसा जमा हो रहा था. यहीं से पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की पहली कड़ी मिली.
पुलिस ने जब उस बैंक अकाउंट के मालिक पवन कुमार को पकड़ा, तो उसने चौंकाने वाला खुलासा किया. पवन कुमार ने बताया कि वह कमीशन के बदले अपना बैंक अकाउंट गिरोह को इस्तेमाल करने देता था. यानी ठगी का पैसा सीधे उसके खाते में आता था और वह उसमें से हिस्सा लेकर बाकी रकम आगे ट्रांसफर कर देता था. इस जानकारी के बाद पुलिस को यकीन हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर गिरोह का काम है.
पवन कुमार से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम एक कंपनी हर्बिटेक्चर हेल्थकेयर तक पहुंची. यह कंपनी गोविंदपुरी इलाके में एक ऑफिस से संचालित हो रही थी, जहां असल में फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा था. पुलिस ने तुरंत मौके पर रेड की और वहां का नजारा देखकर हैरान रह गई. ऑफिस में बाकायदा कॉल सेंटर सेटअप था, जहां से लोगों को कॉल करके ठगी की जा रही थी.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां से 20 से ज्यादा महिलाओं और 10 पुरुषों को कॉलिंग का काम करते हुए पाया. ये सभी लोग ग्राहकों से बातचीत करके उन्हें झांसे में लेने का काम कर रहे थे. मौके से कई डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए. पुलिस का मानना है कि इन सबूतों के जरिए और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
जांच में सामने आया कि यह गिरोह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वजन घटाने वाले प्रोडक्ट्स के विज्ञापन डालता था. जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों के जरिए संपर्क करता, तो शुरुआत में उसे एक सस्ता प्रोडक्ट भेजा जाता था, ताकि उसका भरोसा जीता जा सके. इसके बाद धीरे-धीरे उससे और पैसे मांगे जाते थे. कई मामलों में पैसे लेने के बाद प्रोडक्ट भेजा ही नहीं जाता था.
ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी, ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो जाए. जैसे ही पैसा मिल जाता, आरोपी पीड़ित से संपर्क तोड़ देते थे और उनका नंबर ब्लॉक कर देते थे. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगा है. इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर ऑफर पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है.
अंशुल सिंह