एक किडनैपिंग, बच्चे की लाश और जमीन में दफन राज... कैसे पुलिस को 26 साल तक चकमा देता रहा सलीम वास्तिक?

1995 के संदीप बंसल किडनैपिंग और मर्डर केस में फरार कातिल का चेहरा जब सबके सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया. ये वो शख्स था, जिस पर हमला करने वाले दो भाईयों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार डाला. ये था यूट्यूबर सलीम वास्तिक, जो 26 साल बाद पकड़ा गया. जानिए कैसे ये शातिर बदलता रहा पहचान और पुलिस को देता रहा चकमा.

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शातिर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान पुलिस को चकमा देता रहा (फोटो-ITG) शातिर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान पुलिस को चकमा देता रहा (फोटो-ITG)

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

दिल्ली के एक मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या का मामला करीब 26 साल तक राज बनकर जमीन में दफन रहा. और इस वारदात को अंजाम देने वाला शातिर अपराधी कानून की पकड़ से बचने के लिए बार-बार अपनी पहचान बदलता रहा. पर आखिरकार वो शातिर कातिल अब पुलिस के शिकंजे में आ ही गया. ये कहानी है सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक की, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. इस कहानी में किडनैपिंग, मर्डर, फरारी, फर्जी पहचान, सोशल मीडिया स्टारडम और फिल्म बनने की तैयारी जैसे कई चौंकाने वाले मोड़ शामिल हैं.

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20 जनवरी 1995, दिल्ली
यही वो दिन था, जब दिल्ली के एक बिजनेसमैन का 13 साल का बेटा संदीप बंसल रोज की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकला. लेकिन उस दिन वह वापस नहीं लौटा. घरवाले उसकी तलाश में जुट गए. स्कूल में पूछा. दोस्तों के यहां पूछताछ की. कुछ पता नहीं चल रहा था. इसी दौरान यानी कुछ ही घंटों बाद बच्चे के घर पर एक फोन कॉल आई. कॉल करने वाले ने बच्चे की सुरक्षित रिहाई के बदले 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी. साथ ही धमकी दी गई कि अगर पुलिस को सूचना दी गई तो बच्चे की जान ले ली जाएगी. इस धमकी ने परिवार को दहशत में डाल दिया.

बंसल परिवार काफी डरा हुआ था और खामोश भी. लेकिन इसी बीच पुलिस को भी इस मामले की जानकारी मिल गई. लिहाजा पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी. पुलिस हर एंगल से जांच कर रही थी. कुछ ही समय बाद जो इस मामले में जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को झकझोर दिया. अपहरण के बाद 13 साल के उस बच्चे की हत्या कर दी गई थी. उसकी लाश पुलिस ने दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के एक नाले से बरामद की. यह घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. हर कोई सन्न था.

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जांच के दौरान पुलिस के शक की सुई सलीम खान नाम के एक शख्स पर जाकर टिक गई. ये शख्स कोई और नहीं बल्कि उस बच्चे के स्कूल में कभी मार्शल आर्ट्स सिखा चुका टीचर था. पुलिस उस तक जा पहुंची. जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो धीरे-धीरे इस पूरी वारदात की सच्चाई सामने आने लगी. कड़ी पूछताछ में वो टूट गया और उसने अपना अपराध कबूल कर लिया. उसने यह भी बताया कि इस वारदात में उसका एक साथी अनिल भी शामिल था. दोनों ने पैसों के लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था.

पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी. दोनों जेल में पहुंच चुके थे. मामले की सुनवाई के बाद साल 1997 में कोर्ट ने सलीम खान और उसके साथी अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. साल 2000 में सलीम को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई. जमानत मिलने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया. इसके बाद उसने ऐसा खेल खेला कि पुलिस भी सालों तक उसे पकड़ नहीं सकी.

पुलिस से बचने के लिए सलीम ने खुद को मृत घोषित करवा दिया. उसने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली. पहले वह सलीम अहमद बना और बाद में सलीम वास्तिक के नाम से रहने लगा. वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में छिपता रहा. लगातार लोकेशन बदलता रहा ताकि कोई उसे पहचान न सके. यह उसकी सबसे बड़ी चालाकी साबित हुई.

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आखिरकार वह गाजियाबाद के लोनी इलाके में आकर बस गया. वहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और एक सामान्य जिंदगी जीने का दिखावा करने लगा. आसपास के लोगों को कभी अंदाजा नहीं हुआ कि उनके बीच रहने वाला यह व्यक्ति एक सनसनीखेज मर्डर केस का फरार अपराधी है. फरारी के दौरान उसने एक और नई पहचान बनाई. वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गया और खुद को यूट्यूबर व सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगा. 

वो इस्लाम विरोधी बातें करने लगा. धर्म विरोधी बनाने लगा. उसके वीडियो वायरल होने लगे और वह चर्चा में भी रहने लगा. इसी दौरान दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक गुप्त सूचना मिली कि सलीम वास्तिक नाम का यह यूट्यूबर असल में 1995 के मर्डर केस का फरार आरोपी हो सकता है. इसके बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, फोटो और फिंगरप्रिंट का मिलान शुरू किया. जांच के बाद पुलिस का शक यकीन में बदल गया. 

इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की अगुवाई में एक टीम बनाई गई और लोनी में छापेमारी की गई. वहां से सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह सालों तक पहचान बदलकर पुलिस से बचता रहा. लेकिन गिरफ्तारी के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. पता चला कि एक फिल्म प्रोड्यूसर उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहा था. इसके लिए उसे 15 लाख रुपये एडवांस भी दिए गए थे. 

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यानी एक फरार अपराधी अपनी कहानी को फिल्म में बदलने की तैयारी कर रहा था. फरवरी 2026 में उस पर लोनी में जानलेवा हमला भी हुआ था. हमलावरों ने उस पर करीब 14 बार चाकुओं से वार किए, लेकिन वह बच गया. इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया था. इस हमले के बाद वह और ज्यादा चर्चा में आ गया था.

बताया गया कि सलीम सोशल मीडिया पर विवादित वीडियो बनाता था, जिससे कुछ लोग नाराज थे. इसी वजह से उस पर हमला किया गया. यह घटना उसकी जिंदगी का अहम मोड़ बन गई. इसी के बाद एक फिल्म निर्माता की नजर उस पर पड़ी और उसकी कहानी को फिल्म में बदलने की योजना बनी.

अब पुलिस इस पूरे एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या सलीम ने अपनी कहानी को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था. क्या उसने खुद को फिल्मी किरदार बनाने की कोशिश की? या फिर ये सभी घटनाएं वास्तविक थीं? जांच एजेंसियां हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही हैं. सलीम के खिलाफ फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला भी दर्ज करने की तैयारी है. उसने अलग-अलग नामों से रहकर पुलिस को लगातार गुमराह किया.

सलीम वास्तिक 0007 नाम से उसने सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बना ली थी. यूट्यूब पर उसके हजारों फॉलोअर्स थे, जो उसकी असलियत से अनजान थे. पुलिस जांच में सामने आया कि सलीम का जन्म 1972 में यूपी के शामली में हुआ था. वह मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षक था और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में उतर गया. परिवार ने भी उससे दूरी बना ली थी. अब उसकी गिरफ्तारी के बाद लोग हैरान हैं कि जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना रहा था, वह दरअसल, एक सजायाफ्ता फरार अपराधी था. यह मामला साबित करता है कि कानून की गिरफ्त से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता.

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(गाजियाबाद से मयंक गौड़ का इनपुट)

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