गया रोडरेज: आदित्य के परिवार की 24 घंटे सुरक्षा करेंगे पुलिस के जवान

गया रोडरेज कांड में जान गंवाने वाले आदित्य की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है. इसके मुताबिक गले के बीचों बीच गोली लगने से आदित्य ने दम तोड़ा था. आदित्य के परिवार के लोगों की जान का खतरा देखते हुए बिहार पुलिस ने दो जवान तैनात किए हैं, जो 24 घंटे उनकी सुरक्षा करेंगे. वहीं, इस मामले की जांच को लेकर पुलिस सवालों के घेरे में है.

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आदित्य की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है आदित्य की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है

मुकेश कुमार / कुमार अभिषेक

  • पटना,
  • 12 मई 2016,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

गया रोडरेज कांड में जान गंवाने वाले आदित्य की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है. इसके मुताबिक गले के बीचों बीच गोली लगने से आदित्य ने दम तोड़ा था. आदित्य के परिवार के लोगों की जान का खतरा देखते हुए बिहार पुलिस ने दो जवान तैनात किए हैं, जो 24 घंटे उनकी सुरक्षा करेंगे. वहीं, इस मामले की जांच को लेकर पुलिस सवालों के घेरे में है.

जानकारी के मुताबिक, पुलिस मृतक आदित्य के खून से सने कपड़े सड़क पर फेंके जाने की वजह से सवालों के घेरे में है. यह बात सामने आने के बाद जांच अधिकारी को नोटिस थमा दिया गया है. आदित्य हत्याकांड में खून से सने कपड़े चीख चीखकर सरकार और सिस्टम से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं.

इन कपड़ों की फोरेंसिक जांच होनी चाहिए थी. इन्हें सबूत के तौर पर संभालकर रखा चाहिए था. लेकिन पुलिस ने इन्हें फेंककर क्या साबित किया. पुलिस जिस मुलायमियत से जांच का एलान करती रही, वो आदित्य के परिवार के साथ आखिर कब खडी होंगी. मां-बाप पहले ही चीख-चीख कर कह चुके कि ना पुलिस कुछ करेगी और ना सरकार.

आजतक ने जब कपड़ों को कूडेदान के हवाले करने की खबर दिखाई, तो पुलिस सबूतों को मिटाने के अभियान से जागी. सुबह-सुबह आदित्य के घर से जींस और टी शर्ट जब्त की गई. उनकी बरामदगी दिखाकर एक और भूल और लापरवाही को छिपाने की कोशिश पटना से गया तक दौड़ने लगी. गया पुलिस पुलिस की लापरवाही जाहिर होने लगी.

यही आंख खोलने वाला सच है कि सुशासन राज में गया की स्मार्ट पुलिस का. ना सबूतों को बचाने की फिक्र और ना एमएलसी के लाडले से पूछताछ की जरूरत. आखिर किस रास्ते जा रही है. क्या पुलिस सचमुच ऐसे हत्याकांड को हैंडल करने में फेल हो रही है या फिर सबूतों से छेड़छाड़ किसी को बचाने का हिस्सा है.

एसएसपी गरिमा मलिक ने प्रेस कांफ्रेस करके रॉकी की गिरफ्तारी का ताल ठोककर एलान किया. लेकिन सवाल-जबाव के बीच पुलिस की सबसे बड़ी लापरवाही कैमरे में कैद हो गई. एसएसपी के बगल में बैठा एक अफसर हत्या में इस्तेमाल पिस्टल को बार-बार छू रहा था. क्या ये फिंगर प्रिंट मिटाने की कोशिश थी या किसी को बचाना था.

पुलिस की लापरवाही की ये शुरूआती तस्वीर थी, लेकिन जांच के आगे बढ़ने के साथ ही कलई खुलती गई. एक दिन पहले आदित्य के खून से सने कपड़े के बाहर फेंके मिले, तो रॉकी की रिमांड को लेकर पुलिस की नीयत पर शक बढ़ गया. परिवार को अब ना पुलिस पर यकीन बचा और ना सरकार पर. लिहाजा सीबीआई जांच की मांग उठ रही है.

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