उत्तर प्रदेश के KGMU धर्मांतरण मामले में लखनऊ पुलिस और STF की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को पुलिस ने कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है. रिमांड के दौरान पुलिस उन तमाम ठिकानों पर भी जाने की तैयारी में है, जहां रमीज के संपर्क और नेटवर्क जुड़े होने की बात सामने आई है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूछताछ में रमीज की साजिशों से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी से पहले 18 दिनों तक फरार रहने के दौरान रमीज लगातार पुलिस से बचता रहा और मदद के लिए अपने संपर्कों से गुहार लगाता रहा. STF की जांच में सामने आया है कि फरारी के दौरान रमीज ने करीब 250 फोन कॉल किए.
इन कॉल्स की डिटेल अब जांच एजेंसी के हाथ लग चुकी है. इन्हीं कॉल रिकॉर्ड के आधार पर कई नए कनेक्शन सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है. पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि फरार रहते हुए रमीज ने एरा मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों को सात कॉल किए थे. यहां से दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार आरोपी परवेज ने पढ़ाई की थी.
दर्ज किए जाएंगे डॉक्टरों और कर्मचारियों के बयान
इस कड़ी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. STF ने किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पैथोलॉजी और CCM विभाग के HOD को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है. दोनों विभागों से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे. इसके साथ ही संबंधित स्टाफ के मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं.
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कब्जे में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की 160 पेज की रिपोर्ट
धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में जेल भेजे जा चुके डॉक्टर रमीज के आगरा कनेक्शन पर भी STF की नजर है. आगरा में सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप 'इस्लामिक मेडिकोज' की जांच जारी है. ग्रुप के एडमिन और सदस्यों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है. जांच एजेंसी ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की 160 पन्नों की रिपोर्ट अपने कब्जे में ले ली है.
आगरा मेडिकल कॉलेज में मिले थे परवेज और रमीज
वहीं विशाखा कमेटी की 150 पन्नों की रिपोर्ट का भी अध्ययन शुरू कर दिया गया है. इन रिपोर्टों में सामने आए बिंदुओं के आधार पर सबूत जुटाए जा रहे हैं. यह भी सामने आया है कि लखनऊ के बाद परवेज ने आगरा के मेडिकल कॉलेज में MD में दाखिला लिया था. उसी दौरान आगरा में MBBS कर रहे रमीज से उसकी मुलाकात हुई थी.
'इस्लामिक मेडिकोज' नाम से बनाया था व्हाट्सएप ग्रुप
इसके बाद में दोनों ने 'इस्लामिक मेडिकोज' नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसके जरिए धर्मांतरण और देश विरोधी साजिशों को अंजाम देने का आरोप है. फरारी के दौरान रमीज ने न सिर्फ कानूनी मदद के लिए कॉल किए, बल्कि कई लोगों से पैसे भी मांगे. उसने गिरफ्तारी से बचने के तरीके पूछे और लाखों रुपए की मांग तक कर डाली.
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