आधी रात, नदी का किनारा और तीन दरिंदे... रूह कंपा देने वाले 'हम्पी कांड' की खौफनाक कहानी

कर्नाटक के हम्पी की उस काली रात ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था. सनापुर झील के किनारे गिटार बजाते और तारे निहारते सैलानियों को क्या पता था कि पेट्रोल मांगने के बहाने मौत और दरिंदगी उनका रास्ता देख रही है. कोर्ट ने इस 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामले में जो फैसला सुनाया है, वह एक बड़ा सबक है.

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विदेशी महिला से गैंगरेप केस के दरिंदों को फांसी का हुक्म, 10 महीने में आया फैसला. (Photo: ITG) विदेशी महिला से गैंगरेप केस के दरिंदों को फांसी का हुक्म, 10 महीने में आया फैसला. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:20 AM IST

कर्नाटक के कोप्पल जिले का हम्पी अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. पिछले साल हम्पी एक ऐसी खौफनाक वारदात का गवाह बना जिसने देश की साख पर दाग लगा दिया. उस रात एक इजरायली टूरिस्ट समेत दो महिलाओं के साथ तीन लोगों ने गैंगरेप किया. एक पुरुष टूरिस्ट को मौत के घाट उतार दिया. 10 महीने बाद कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है.

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सोमवार को गंगावती सिविल कोर्ट के जज सदानंद नागप्पा नाइक ने अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने इस घिनौने अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए दोषी मल्लेश उर्फ हांडी मल्ला, शरणबसव और चैतन्य साईं को फांसी की सजा का आदेश दिया. इस फैसले के साथ उस काली रात की यादें ताजा हो गईं, जब इन दरिंदों ने हैवानियत का नंगा नाच किया था.

तारीख थी 6 मार्च 2025. रात के करीब 11 बज रहे थे. सनापुर झील के पास तुंगभद्रा नहर के किनारे एक होमस्टे संचालक अपने चार मेहमानों पंकज (महाराष्ट्र), बिभास (ओडिशा), डेनियल (अमेरिका) और एक इजराइली महिला पर्यटक के साथ बैठी थी. वे संगीत की लहरों में डूबे थे, गिटार बज रहा था और सब मिलकर खुले आसमान के नीचे तारों को निहार रहे थे. 

हम्पी गैंगरेप-मर्डर केस में इन तीनों हैवानों को फांसी की सजा सुनाई गई है.

तभी मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोग वहां पहुंचे. उन्होंने पेट्रोल पंप का पता पूछा. होमस्टे संचालक ने जब बताया कि पास में कोई पंप नहीं है और सनापुर जाने की सलाह दी, तो उन लोगों ने 100 रुपए की मांग कर दी. अनजान लोगों को पैसे देने से मना करने पर विवाद बढ़ गया. इस बीच ओडिशा के पर्यटक बिभास ने शांति बनाने के लिए उन्हें 20 रुपए थमा दिया. 

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इतने कम पैसे देख तीनों आगबबूला हो गए. कन्नड़ और तेलुगु में गालियां देते हुए उन्होंने पत्थरों से सिर फोड़ने की धमकी दी. हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब उन्होंने महिलाओं पर हमला कर दिया. दो आरोपियों ने होमस्टे संचालक को बेरहमी से पीटा, जबकि तीसरे ने तीन पुरुष पर्यटकों को गहरी नहर में धकेल दिया. इसके बाद होमस्टे संचालक को नहर के किनारे खींचा.

उसका गला घोंटने की कोशिश की गई. इसके बाद इजरायली टूरिंस्ट और उसके साथ गैंगरेप किया गया. इतना ही नहीं, उन्होंने उनका बैग, दो मोबाइल और 9500 रुपए कैश भी लूट लिए. इस खूनी खेल को अंजाम देने के बाद तीनों अपनी बाइक पर सवार होकर फरार हो गए. अगली सुबह यानी 7 मार्च को जब पुलिस और फायरब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची.

बिभास की तलाश की गई. खोजी कुत्तों की मदद भी ली गई. लेकिन सफलता नहीं मिली. 8 मार्च की सुबह घटनास्थल से दो किलोमीटर दूर पावर हाउस के पास उसका शव बरामद हुआ. इस घटना ने न केवल कर्नाटक बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी. केस की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. 

महज 10 महीने की सुनवाई में कोर्ट ने माना कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में आता है. 7 फरवरी को ही तीनों को दोषी करार दिया गया था और 16 फरवरी को जज सदानंद नागप्पा नाइक ने उनके डेथ वारंट पर मुहर लगा दी. यह फैसला उन पर्यटकों के जख्मों पर मरहम की तरह है जिन्होंने उस रात अपनी आंखों के सामने मौत का तांडव देखा था.

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