अंकिता भंडारी को इंसाफ मिला या सच दब गया... उम्रकैद के 8 महीने बाद फिर क्यों सुलगा उत्तराखंड? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के 8 महीने बाद फिर क्यों भड़का उत्तराखंड? वायरल ऑडियो-वीडियो, वीआईपी एंगल और CBI जांच की मांग ने केस को फिर सुर्खियों में ला दिया. पढ़ें अंकिता भंडारी मर्डर केस की पूरी कहानी.

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इस मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है (फोटो-ITG) इस मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • देहरादून,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:54 AM IST

Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था. 18 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी का मर्डर किया गया था. लेकिन उसकी लाश 24 सितंबर को मिली थी और तीन साल चार महीने बाद, मई 2025 में कोर्ट ने बीजेपी नेता के पुत्र पुलकित आर्य, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. लेकिन सवाल यह है कि अगर इस मामले में इंसाफ मिल चुका था, तो उम्रकैद के 8 महीने बाद जनता उत्तराखंड की सड़कों पर फिर क्यों उतर आई? क्यों लोग एक बार फिर अंकिता के नाम पर आंदोलन कर रहे हैं? क्या इस मामले में मिला इंसाफ अधूरा था? अगर अंकिता को इंसाफ मिल चुका था तो फिर ये भीड़ अंकिता को और कौन सा इंसाफ दिलाने की मांग कर रही है? 

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सवाल ये भी है कि क्या अदालत का फैसला गलत है. क्या अंकिता भंडारी का असली कातिल कोई और है. क्या ताकतवर लोगों ने एक ताकतवर वीआईपी को बचाने के लिए कानून और इंसाफ का ये सारा ड्रा्मा रचा. आखिर तीन साल और चार महीने बाद अंकिता भंडारी का केस एक बार फिर क्यों इतनी सुर्खियों में आ गया कि खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को सफाई देने के लिए बाकायदा प्रेस कांफ्रेस बुलानी पड़ी.

तो इस कहानी की शुरुआत होती है बीते साल 29 दिसंबर को. बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य समेत जब कुल तीन लोगों को अंकिता भंडारी मर्डर केस में उम्रकैद की सजा मिली. उसके बाद सभी इस केस को अब भूल चुके थे. लेकिन तभी 29 दिसंबर को उर्मिला सनावर नाम की एक महिला सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालती है. इस वीडियो के जरिए वो ये दावा करती है कि अंकिता का कत्ल इसलिए हुआ क्योंकि अंकिता ने एक वीवीआईपी को उस रिजॉर्ट में एक्स्ट्रा सर्विस देने से इनकार कर दिया था. जिस रिजॉर्ट में वो सिर्फ 20 दिन पहले बतौर रिसेप्सनिस्ट काम करने आई थी. 

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इस वीडियो के बाद उसी उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो भी जारी किया. जिसमे दावा किया गया कि वो वीवीआईपी नेता ही अंकिता के कत्ल के लिए जिम्मेदार है. इस ऑडियो और वीडियो में उस वीवीआईपी नेता का नाम भी लिया गया. हम यहां उस वीवीआईपी नेता का नाम इसलिए नहीं ले सकते क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसा करने पर 7 जनवरी को रोक लगा दी है. दरअसल इस वीडियो ऑडियो के सामने आने के बाद वो वीवीआईपी नेता सीधे दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया था. उसी की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी केस को लेकर इस वीवीआईपी नेता का नाम लेने पर रोक लगा दी है.

अब आइए उस वीवीआईपी के नाम को माइनस करते हुए उस वीडियो और ऑडियो की थोड़ी से झलकियां सुनते हैं, जिसकी वजह से उत्तराखंड में अचानक अंकिता भंडारी केस एक बार फिर से जिंदा हो उठा है. और लोग उस वीवीआईपी नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जगह जगह धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.

दरअसल, उर्मिला सनावर नाम की जिस महिला ने ऑडियो वीडियो के जरिए ये दावा किया है वो एक एक्ट्रेस होने के साथ साथ खुद को हरिद्वार से बीजेपी के एक पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी बताती है. उर्मिला ने अंकिता भंडारी के कत्ल से जुड़ा जो ऑडियो जारी किया है, उसमें उसकी अपनी आवाज के अलावा जो दूसरी आवाज है वो सुरेश राठौर की ही है. इसी ऑडियो में सुरेश राठौर उर्मिला को ये बता रहा है कि अंकिता का कत्ल क्यों और कैसे हुआ और बीजेपी का वो वीवीआईपी नेता कौन है.

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इसी ऑडियो और वीडियो के सामने आते ही अचानक उत्तराखंड में लोग सड़कों पर उतर आए. इस मांग के साथ कि उस वीवीआईपी नेता को गिरफ्तार किया जाए और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए. यहां तक की खुद बीजेपी के अंदर ही बहुत सारे नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी से अंकिता भंडारी केस की फिर से जांच कराने की मांग रखी है. खुद अंकिता भंडारी के पिता ने भी मुख्यमंत्री से ये मांग की है कि जो नए सबूत सामने आए हैं, उसके मद्देनजर अंकिता भंडारी केस की जांच दोबारा होनी चाहिए और ये जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए. इसी मांग को लेकर मुख्यमंत्री धामी के दफ्तर के बाहर भी धरना दिया गया.

अंकिता भंडारी मर्डर केस को लेकर तीन साल पहले जो स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम बनाई गई थी, उस टीम के एक मेंबर हरिद्वार ग्रामीण एसपी शेखर सुयैल ने हाल ही में कहा था कि केस की तफ्तीश के दौरान तब भी एसआईटी ने वीआईपी एगंल से भी इस मामले की जांच की थी लेकिन तब इससे जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला था.

ऑडियो वीडियो के सामने आने और लोगों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार को मजबूरन एक बार फिर से अंकिता मर्डर केस में एसआईटी का गठन करना पड़ा. एसआईटी ने बुधवार को अर्मिला सनावर से उनके ऑडियो वीडियो और दावों के बारे में लंबी पूछताछ की. हालांकि इससे पहले उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड पुलिस ने ये कहा था कि ऑ़डियो वीडियो जारी करने के बाद उर्मिला कहीं गायब हो गईं हैं, लेकिन बुधवार को उर्मिला खुद ही एसआईटी के सामने पहुंची. एसआईटी उर्मिला से ऑडियो वीडियो की विश्वसनियता के साथ साथ ये भी जानना चाहती है कि उन्होंने इस बात का खुलासा इतने साल बाद क्यों किया. 

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हालांकि 5 जनवरी 2026 को ही उर्मिला ने सोशल मीडिया पर फिर एक पोस्ट डाला और इसका जवाब भी दिया. उर्मिला का कहना था कि अंकिता भंडारी मर्डर केस में जो नया खुलासा हुआ वो एक नवंबर 2025 को हुआ था. उसी दिन उसने ये ऑडियो रिकॉर्ड किया था. इस पोस्ट में उर्मिला ये शक भी जता रहीं हैं कि शायद उनका ये मोबाइल अब गायब ना कर दिया जाए.

इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बुधवार को इस मुद्दे पर ये भी सफाई दी कि जिस वीवीआईपी नेता का नाम सामने आ रहा है, वो 10 सितंबर से 20 सितंबर के दरम्यान उत्तराखंड में थे ही नहीं. मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेस में उस वीवीआईपी नेता को बार बार प्रभारी कह कर मुखातिब किया. वीवीआईपी नेता या प्रभारी की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग को लेकर जिस तरह से उत्तराखंड में आंदोलन तेज होता जा रहा है उसी के मद्देनजर बुधवार को मुख्यमंत्री के अलावा उत्तराखंड पुलिस को भी मीडिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी.

हालांकि सरकार और पुलिस की तरफ से तमाम भरोसा दिलाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया है. खुद अंकिता भंडारी के पिता ने भी इस बंद का समर्थन किया है.

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(पौड़ी से सिद्धांत उनियाल, चमोली से कमलनयन सिलोरी, कोटद्वार से विकास वर्मा के साथ देहरादून से अंकित शर्मा का इनपुट)

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