भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में 7वां वित्त आयोग लागू करने का वादा किया था. सरकार बनते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में हुई कैबिनेट की दूसरी बैठक में ही 7वें वित्त आयोग (7th Pay Commission) के गठन को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है. कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब आने वाले दिनों में राज्य के 20 लाख अधिक कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि अभी सरकार ने ये साफ नहीं किया है कि कर्मचारियों की सैलरी में आखिर कितना बढ़ोतरी होगी.
20 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को लाभ
मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को 6वें वित्त आयोग के आधार पर वेतन का भुगतान किया जा रहा है, जिसके कारण उनकी सैलरी उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों (जहां पहले से 7वां वित्त आयोग लागू है) के मुकाबले काफी कम है. कर्मचारियों के वेतन में होने वाली यह सटीक बढ़ोतरी मुख्य रूप से 'फिटमेंट फैक्टर्स' पर निर्भर करेगी. इसके साथ ही, कर्मचारियों को संशोधित हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य सरकारी भत्तों का भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा.
हालांकि मौजूदा चर्चाओं और फिटमेंट फैक्टर के अनुमान के आधार पर माना जा रहा है कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में करीब 20% से 35% तक बढ़ोतरी हो सकती है. कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी इससे भी ज्यादा हो सकती है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जिनकी वर्तमान बेसिक पे कम है.
महंगाई भत्ते (DA) पर सस्पेंस
कैबिनेट बैठक से पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी राज्य कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में भी बढ़ोतरी की घोषणा कर सकते हैं. लेकिन उसपर फिलहाल कैबिनेट में चर्चा नहीं हो पाई है.
बता दें, पश्चिम बंगाल में DA (Dearness Allowance) करीब 22% है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लगभग 58% DA मिल रहा है. 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद राज्य कर्मचारियों को केंद्र के बराबर वेतन और DA का फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी (effective) माना जा सकता है. 7वां वेतन आयोग लागू होने के बाद बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल आ सकता है. HRA और अन्य भत्ते भी बढ़ सकते हैं. पेंशनर्स को भी फायदा मिलने की संभावना है.
वहीं एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल सरकार अपने कर्मचारियों को अब जाकर 6वें वेतन आयोग से 7वें वेतन आयोग की ओर ले जा रही है. वहीं केंद्र सरकार के स्तर पर इससे कहीं आगे की तैयारी चल रही है. केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में ही देश के केंद्रीय कर्मचारियों के लिए '8वें वित्त आयोग' (8th Pay Commission) का गठन कर दिया है.
इस आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और यह विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर विचार-विमर्श की प्रक्रिया में है. पश्चिम बंगाल में इस फैसले के बाद कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतें काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है.
आजतक बिजनेस डेस्क