भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली, सेंसेक्स 756.84 अंक और निफ्टी 198.50 अंक गिरकर बंद हुए. सबसे ज्यादा निफ्टी आईटी इंडेक्स में 4 फीसदी का दबाव रहा. लेकिन एक ओर जहां बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी- 50 भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं दूसरी ओर तमाम रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो ग्रीन में रहे.
IT सेक्टर ने बाजार पर बनाया दबाव
एक्सपर्ट्स के मुताबिक बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण दिग्गज आईटी (IT) कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली रही. टीसीएस और इंफोसिस के शेयर 3 से 4 फीसदी तक टूट गए. जबकि HCL टेक के कमजोर नतीजों के बाद शेयर 11 फीसदी तक फिसल गए. दरअसल, वैश्विक स्तर पर तकनीक खर्च में कटौती और कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों के चलते टेक स्टॉक्स में यह गिरावट देखी गई. वहीं निफ्टी में आईटी सेक्टर का वेटेज काफी अधिक है, इसलिए इन दिग्गज शेयरों की गिरावट ने पूरे इंडेक्स को नीचे खींच लिया.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी की खबरों से ग्लोबल मार्केट का मूड एक बार फिर बिगड़ गया है. कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वहीं विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी थम नहीं रही.
रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो ग्रीन में कैसे?
अब सवाल उठता है कि बाजार में गिरावट के बावजूद रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो ग्रीन में कैसे नजर आए? क्योंकि लार्जकैप शेयरों में बिकवाली हावी था, लेकिन उसी दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप में जबरदस्त खरीदारी देखी गई. कारोबार के अंत में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.2% की बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 1% से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया.
बाजार में कारोबार के दौरान एडवांस डिक्लाइन रेशियो भी काफी सकारात्मक रही. इसका मतलब है कि गिरने वाले शेयरों के मुकाबले बढ़ने वाले शेयरों की संख्या अधिक थी. क्योंकि गिरावट कुछ भारी-भरकम स्टॉक्स तक सीमित थी, जबकि शेष बाजार में मजबूती बनी रही.
बता दें, भारत में अधिकतर रिटेल निवेशक पिछले कुछ वर्षों से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अधिक निवेश कर रहे हैं. इन इंडेक्स में मजबूती के कारण उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू बेंचमार्क इंडेक्स (निफ्टी) के विपरीत बढ़ती नजर आई.
यही नहीं, बुधवार को मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी से ये तस्वीर हो गई कि घरेलू निवेशकों का बाजार पर भरोसा अभी भी बना हुआ है. हालांकि, आईटी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखने वाले निवेशक को घबराने की जरूरत नहीं है.
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)
आजतक बिजनेस डेस्क