ईरान और इजरायल के बीच युद्ध से दुनियाभर में कोहराम मचा है. वित्तीय अस्थिरता को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शेयर बाजार 2 मार्च और 3 मार्च 2026 के लिए बंद कर दिए गए हैं. इस बीच अमेरिका समेत चीन, जापान और भारत के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. लेकिन एक देश ऐसा भी जहां का शेयर बाजार जश्न मना रहा है.
दरअसल, ईरान पर हमले के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल का माहौल है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर ऊर्जा कीमतों और ऊर्जा कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है. कहा जा रहा है कि ईरान के ड्रोन हमले के बाद सऊदी की अरामको ने रास तनुरा रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दी है. यह जगह सऊदी की सबसे बड़ी और सबसे स्ट्रैटेजिक एनर्जी साइट्स में से एक है. इस हमले की खबर के ब्रेंट क्रूड के भाव अचानक उछाल देखने को मिल रहा है.
रूस के शेयर बाजार में जोरदार तेजी
लेकिन इस बीच रूसी शेयर बाजार में तेजी का माहौल है, खासतौर पर रूसी तेल और गैस कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिल रहे हैं. Rosneft, Lukoil, Gazprom Neft और Novatek के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी है. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होती है तो रूसी तेल की मांग एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में बढ़ सकती है. बता दें, साल 2025 में रूस ने कुल लगभग 238 मिलियन टन तेल निर्यात किया, और इसका करीब 80% चीन और भारत को गया था.
रूसी स्टॉक मार्केट के प्रमुख इंडेक्स MOEX में सोमवार 2 मार्च को करीब 1.50 फीसदी तेजी देखी जा रही है, तेल और गैस कंपनियां के शेयर Rosneft में शानदार 6 फीसदी की तेजी, Novatek में 3 फीसदी की तेजी, Lukoil में 2 फीसदी, Gazprom में 1 फीसदी और Tatneft में करीब साढ़े 3 फीसदी की तेजी है.
रूसी मार्केट में तेजी के क्या कारण?
इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर गहराता संकट है, मध्य पूर्व की स्थिति ने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 15% तक की तेज बढ़ोतरी कर दी. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude लगभग 79.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता देखा गया. बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है और विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष और गहराता है तो भाव में और तेज उछाल आ सकता है.
दरअसल, युद्ध के बीच टेंशन की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है. खाड़ी क्षेत्र से निकलने तेल का वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है. अगर युद्ध के कारण टैंकर यातायात बाधित होता है, तो आपूर्ति में गंभीर रुकावट आ सकती है.
एक्सपर्ट्स ने कहा- रहें अलर्ट
RBC Capital Markets में ग्लोबल कमोडिटी स्ट्रैटेजी की प्रमुख Helima Croft ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र का बड़ा तेल भंडार अटक सकता है. कई विश्लेषक अब सबसे खराब स्थिति में कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जता रहे हैं.
गौरतलब है कि ईरान पर हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है. जहां एक ओर रूसी कंपनियों को संभावित लाभ दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महंगे तेल का खतरा मंडरा रहा है. आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर तेल बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.
आजतक बिजनेस डेस्क