डर यही था! रोजाना 2000 करोड़ का चूना... डीजल पर 45 रुपये लीटर, तो पेट्रोल पर इतना नुकसान

India OMC Losses: कुल नुकसान में से लगभग 1650 करोड़ रुपये डीजल और करीब 350 करोड़ रुपये पेट्रोल से जुड़ा है. यानी मौजूदा रेट पर डीजल बेचने से कंपनियों को ज्यादा नुकसान हो रहा है. 

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तेल कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान. (Photo: Getty) तेल कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान. (Photo: Getty)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:33 PM IST

जिसका डर था. वही अब होने लगा है. हर रोज देश को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. मिडिल-ईस्ट में तनाव से तेल संकट गहराने लगा है. सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. 

दरअसल कच्चे तेल में उछाल से भारतीय तेल कंपनियों की परेशानी बढ़ती जा रही हैं. क्योंकि भारत करीब 85% तेल आयात करता है, और पिछले 15 दिनों में कच्चे तेल की कीमत 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है. तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ते हैं. 

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तेल कंपनियों को हर रोज भारी नुकसान

इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल बेचने पर भारी नुकसान हो रहा है. कच्चे तेल में उछाल से Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL जैसी कंपनियां हर दिन करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं.

दरअसल, ब्रोकरेज फर्म Systematix के मुताबिक मौजूदा समय में पेट्रोल बेचने पर कंपनियों को करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 45 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. कुल नुकसान में से लगभग 1650 करोड़ रुपये डीजल और करीब 350 करोड़ रुपये पेट्रोल से जुड़ा है. यानी मौजूदा रेट पर डीजल बेचने से पेट्रोल के मुकाबले कंपनियों को ज्यादा नुकसान हो रहा है. 

ईरान-इजरायल के बीच युद्ध गहराया

इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना और परिवहन लागत में इजाफा बताया जा रहा है. मिडिल-ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के कारण तेल टैंकरों के लिए फ्रेट चार्ज और बीमा प्रीमियम काफी बढ़ गए हैं. इससे भारत के लिए तेल आयात करना पहले की तुलना में ज्यादा महंगा हो गया है.

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इसके अलावा रूस से मिलने वाले कच्चे तेल की कीमतों में भी बदलाव आया है. पहले जहां रूस का तेल अंतरराष्ट्रीय कीमत से कम पर मिलता था, वहीं अब कई खेप ब्रेंट कीमत से 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर मिल रही हैं. इससे भारत की तेल कंपनियों की लागत और बढ़ गई है. 

पेट्रोल-डीजल महंगा होने वाला है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां फिलहाल खुद नुकसान उठाकर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रख रही हैं. लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो या तो कंपनियों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गैस बाजार में भी दबाव बढ़ रहा है. कतर से सप्लाई रुकने और वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने से स्पॉट LNG कीमतें एक महीने में 50% तक बढ़ गई हैं, जिससे भारत की गैस सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है. 
 

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