Petrol-Diesel Price Hike: 3 से ₹4 से कुछ नहीं होगा, इतने बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम!

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी तक दो बार बढ़ोतरी की गई है, जिसके तहत करीब 4 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं. हालांकि, अब ये बढ़ोतरी और भी ज्‍यादा हो सकती है.

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फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम. (File Photo: ITG) फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्‍चे तेल के दामों में तेजी के बीच, देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम में दो बार बढ़ोतरी की गई है. पहली बार 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3-3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था और आज यानी 19 मई को इसके दाम में 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. 

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इस हिसाब से देखा जाए तो देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम में करीब 4 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन अब एक्‍स्‍पर्ट का कहना है कि यह बढ़ोतरी काफी नहीं है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में डबल अंकों में बढ़ोतरी होनी चाहिए, तभी सरकारी तेल कंपनियां नुकसान की भरपाई कर पाएंगी.

कितने रुपये बढ़ने चाहिए पेट्रोल-डीजल के दाम? 
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से बने आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारत को ईंधन की कीमतों में ज्‍यादा बढ़ोतरी करने की आवश्‍यकता है. तर्क है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी काफी नहीं है और तेल कंपनियों के बढ़ते नुकसान की पूरी तरह से भरपाई के लिए प्रति लीटर ₹13-17 की अतिरिक्त बढ़ोतरी की आवश्‍यकता हो सकती है. 

ब्रोकरेज फर्म ने आगे ये भी कहा कि अगर वेस्‍ट एशिया में चल रहा संघर्ष जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी और उपायों जैसी सरकारी कार्रवाइयां मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए काफी नहीं हैं. इसके लिए ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. साथ ही कुछ अन्‍य ठोस कदम उठाने होंगे.

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भारी नुकसान झेल रहीं कंपनियां
कोटक ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी कंपनियां भारी नुकसान उठा रही हैं. ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि कम वसूली के कारण सरकारी तेल कंपनियों को मौजूदा समय में हर महीने 25000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

डीजल की अंडर-रिकवरी लगभग ₹11.40 प्रति लीटर और पेट्रोल की अंडर-रिकवरी लगभग ₹14.30 प्रति लीटर होने का अनुमान है. इन अनुमानों के आधार पर, कोटक का मानना ​​है कि नुकसान की पूरी भरपाई के लिए कीमतों में ₹13-17 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है. 

रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. बिजनेस टुडे टीवी ने बताया कि तेल कंपनियां पिछले 75 दिनों में हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं, हालांकि भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे जारी रह सकती है. 

धीरे-धीरे ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का प्‍लान 
कच्‍चे तेल की कीमतें ऊपर जाने के साथ ही अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी की संभावना बनी हुई है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक अधिकारी ने इंफॉर्मिस्ट को बताया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और महंगाई के दबाव को सीमित करने के उद्देश्य से कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जा रही है. 

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इस सप्ताह की शुरुआत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि तेल कंपनियों को हरदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, हालांकि 15 मई को कीमतों में हुई बढ़ोतरी से नुकसान में लगभग एक-चौथाई की कमी आई है. IDFC फर्स्ट बैंक को मौजूदा कम वसूली के कारण आने वाले महीनों में खुदरा ईंधन की कीमतों में और वृद्धि की भी उम्मीद है. 

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