कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और हफ्तेभर में दो बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से देश के कई शहरों में फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. भींड के कारण कई जगहों पर पेट्रोल-डीजल मिलना भी बंद हो चुके हैं. महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु तक ईंधन भरवाने के लिए लोग परेशान दिख रहे हैं.
महाराष्ट्र के पुणे में अफवाह फैलने से पेट्रोल और डीजल की पैनिक बाइंग हुई, जिस कारण पंपों पर लंबी कतारें और भारी भींड जमा हो गई. वहीं उत्तराखंड के टिहरी और महाराष्ट्र के जालना में भी ऐसे ही कुछ हालात रहे. उत्तर प्रदेश के हापुड़ में तो पेट्रोल और डीजल नहीं मिलने से एक पंप पर तोड़फोड़ तक हो गई.
उधर, चंडीगढ़ में भी ईंधन को लेकर अफरा-तफरी रही. सिर्फ एक अफवाह उड़ने से ईंधन के लिए लोग परेशान दिखे. एक पेट्रोल पंप के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिन पर लिखा था कि चार पहिया वाहनों के लिए 500 रुपये और दो पहिया वाहनों के लिए 1500 रुपये तक ही ईंधन भरा जाएगा. सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल होते ही शहर के लोग ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ पड़े. हालांकि, बाद में स्थिति पर काबू पाया गया.
लंबी लाइनों में लगे लोग
रायपुर में पेट्रोल और डीजल भरनवाने के लिए लोगों की लंबी कतारें रहीं. एक समय में 300 से ज्यादा वाहन ईंधन भरवाने के लिए कतार में लगे हुए थे. कई पंपों पर राशिनिंग व्यवस्था भी देखने को मिली. बड़ी-बड़ी गाड़ियां तक टैंक फुल करवाने के लिए लाइन में लगे रहे.
सरकार की ओर से कोई भी आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है जिसमें भारत में पेट्रोल या डीज़ल की कमी का ज़िक्र हो. तेल कंपनियों ने भी आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट की घोषणा नहीं की है. फिर भी छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में, खासकर शहरी इलाकों और जहां ट्रांसपोर्ट ज़्यादा चलता है, वहां घबराहट में खरीदारी देखी गई. इसी तरह, देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल को लेकर माहौल रहा.
क्यों अफरा-तफरी में हो रही खरीदारी?
दरअसल, वेस्ट एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है, जिस कारण भारत में भी हफ्तेभर के दौरान पेट्रोल और डीजल के दाम में दो बार बढ़ोतरी की गई है. हालांकि, ये बढ़ोतरी 4 रुपये तक ही हुई है, लेकिन अभी और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. सरकारी तेल कंपनी IOCL ने खुद कहा है कि हमे इसके बारे में जानकारी नहीं है कि तेल कीमतें कितनी और बढ़ेंगी, लेकिन महंगाई का भार एकदम से लोगों पर नहीं डाला जाएगा. ईंधन की कीमतें धीरे-धीरे करके बढ़ाई जाएंगी.
तेल की कीमतें कितनी और बढ़ सकती हैं?
कोटक इंस्टिट्यूशनल ने कहा है कि अभी जिस हिसाब से तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, उस हिसाब से देखा जाए तो तेल कंपनियों को कम से 13 से 17 रुपये पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने चाहिए. 3 से 4 रुपये पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से बहुत ज्यादा असर नहीं होगा.
गौरतलब है कि होर्मुज संकट के कारण कच्चे तेल का आयात प्रभावित हुआ है और इसके दाम में लगातार उछाल आई है. कच्चे तेल की कीमते 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं, जिस कारण कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम में 80 फीसदी तक इजाफा हुआ है. हालांकि, भारत में स्थिति सामान्य है और ईंधन की कीमतें 3 फीसदी तक ही बढ़ी हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क