करीब एक दशक पहले तक पर्सनल लोन की पहुंच चुनिंदा लोगों तक सीमित थी. अक्सर लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से गोल्ड लोन या प्रॉपर्टी के बदले मिलने वाले सिक्योर्ड लोन पर निर्भर रहते थे. उस समय कोलैटरल ही लोन मिलने का सबसे बड़ा आधार माना जाता था.
दरअसल, Paisabazaar.com के CEO संतोष अग्रवाल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स और नए लेंडिंग मॉडल्स के चलते अब पर्सनल लोन आम लोगों के लिए ले पाना अधिक सरल हो गया है. आज के समय लोन प्राप्त करने के लिए केवल संपत्ति होना जरूरी नहीं, बल्कि ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगी है.
अनसिक्योर्ड लोन के मामले में लोन संस्थान कोलैटरल के बजाय आवेदक की इनकम, क्रेडिट स्कोर, क्रेडिट हिस्ट्री और वित्तीय लेन-देन जैसे कारकों के आधार पर जोखिम का आकलन करते हैं और उसी के अनुसार लोन देते हैं. यही बदलाव इस धारणा को मज़बूत करता है कि आज के समय में क्रेडिट तक पहुंच सिर्फ कोलैटरल पर निर्भर नहीं है, बल्कि आवेदक की क्रेडिट प्रोफाइल पर अधिक आधारित है.
लोन संस्थान कैसे करते हैं जोखिम का आकलन?
सिक्योर्ड लोन में, उधारकर्ता द्वारा दिया गया कोलैटरल लेंडर्स के लिए सुरक्षा का काम करता है. अगर ग्राहक लोन चुकाने में असफल रहता है, तो लेंडर उस संपत्ति को जब्त कर अपने नुकसान की भरपाई कर सकता है. इसमें कोलैटरल दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होता है, जहां यह लेंडर्स के लिए जोखिम को कम करता है, वहीं ग्राहक को कम ब्याज दर और अधिक लोन राशि जैसी बेहतर शर्तों का लाभ मिलता है.
इसके विपरीत, अनसिक्योर्ड लोन में किसी प्रकार का कोलैटरल शामिल नहीं होता, यहां आवेदक की क्रेडिट प्रोफाइल ही लेंडर्स के लिए सुरक्षा का काम करती है. लेंडर्स आवेदक की आय, रोज़गार या व्यवसाय की स्थिरता, क्रेडिट स्कोर, मौजूदा वित्तीय दायित्वों और पिछले भुगतान व्यवहार का आकलन कर उसकी भुगतान क्षमता को समझते हैं और लोने देने से जुड़े जोखिम का आकलन करते हैं.
इन सभी पहलुओं के आधार पर लेंडर्स ब्याज दर, लोन राशि और अन्य शर्तें तय करते हैं. यही कारण है कि मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल और स्थिर आय वाले ग्राहक को अनसिक्योर्ड लोन मिलने की अधिक संभावना होती है. आमतौर पर 750 या उससे अधिक के क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को लोन संस्थान प्राथमिकता देते हैं.
सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन के बीच चयन
सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन के बीच चुनाव पूरी तरह उधारकर्ता की जरूरत, क्रेडिट प्रोफाइल और प्राथमिकताओं पर आधारित होना चाहिए. क्योंकि दोनों प्रकार के लोन अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोगी होते हैं. जिनके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति या निवेश उपलब्ध हैं और जो बड़ी या दीर्घकालिक जरूरतों के लिए लोन लेना चाहते हैं, उनके लिए सिक्योर्ड लोन का विकल्प बेहतर हो सकता है.
लेकिन ऐसे लोग जिनके पास कोलैटरल नहीं है या जिन्हें अपेक्षाकृत कम समय में लोन की आवश्यकता है, उनके लिए अनसिक्योर्ड लोन एक सुलभ विकल्प है. हालांकि इनमें ब्याज दरें अधिक हो सकती हैं और योग्यता शर्तें सख्त हो सकती हैं, लेकिन इनकी तेज और सरल प्रोसेसिंग इन्हें इमरजेंसी और शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए उपयुक्त बनाती है.
आजतक बिजनेस डेस्क