प्लान-B पर भारत Full On, अगले हफ्ते बड़ा धमाका... चीन-US को एक साथ झटके देने की तैयारी!

भारत EU के साथ बड़ी डील करने जा रहा है. लेकिन EU के साथ FTA में कृषि और डेयरी को बाहर रखा जाएगा. FTA के तहत EU की मांग है कि 95% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ हटाया जाए, जबकि भारत इसे लगभग 90% तक सीमित रखना चाहता है. 

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भारत EU के बीच बड़ी डील जल्द. (Photo: ITG) भारत EU के बीच बड़ी डील जल्द. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर अमेरिका से तनातनी के बीच भारत लगातार प्लान-B पर काम कर रहा है, इस कड़ी में अगले हफ्ते भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बड़ी डील हो सकती है. 

भारत और EU लंबे समय से बातचीत में लगे मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement– FTA) के अंतिम चरण तक पहुंच चुके हैं, और इसको 27 जनवरी 2026 के इंडिया-EU शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया जा सकता है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula Von Der Leyen) ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है. 

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दरअसल, यह एक ऐसा समझौता जो दुनिया की लगभग 2 अरब आबादी और वैश्विक GDP के चौथाई हिस्से को जोड़ता है. यह FTA मुख्य रूप से सामान, सेवाओं और ट्रेड नियमों को शामिल करेगा. समझौते को EU परिषद में मंजूरी और यूरोपीय संसद की पुष्टि के बाद लागू किया जाएगा, जो एक साल या उससे अधिक समय ले सकता है. यह भारत का एक तरह से 9वां FTA है. 

EU के साथ भी FTA में कृषि और डेयरी को बाहर रखा जाएगा. FTA के तहत EU की मांग है कि 95% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ हटाया जाए, जबकि भारत इसे लगभग 90% तक सीमित रखना चाहता है. 

भारत-EU के बीच डील के फायदे

भारत और EU के बीच साल 2024–25 में करीब 11.8 लाख करोड़ रुपये ($136.5 अरब) का व्यापार हुआ था, जिसमें एक्‍सपोर्ट $75.8 डॉलर था और इम्‍पोर्ट $60.7 डॉलर रहा. लेकिन अब FTA डील के बाद भारत का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ जाएगा. सर्विस सेक्‍टर से लेकर मैन्‍युफैक्‍चरिंग में भी भारत की वस्‍तुओं की संख्‍या यूरोप में बढ़ेगी.

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यूरोप में 450 मिलियन से ज्‍यादा लोग रहते हैं और यह दुनिया का 20 ट्रिलियन डॉलर से बड़ा अर्थव्‍यवस्‍था वाला मार्केट है. एफटीए के बाद भारत को इस बड़े मार्केट में कम या बिना टैक्‍स के एंट्री मिलेगी. यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड ब्लॉक्स में से एक माना जाता है, ऐसे में इसका हिस्‍सा बनकर भारत को लंबे समय तक एक्‍सपोर्ट, इन्‍वेस्‍टमेंट और बिजनेस में बड़ा लाभ मिलने वाला है. अनुमान है कि इस डील के बाद भारत का ईयू में कारोबार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर हो सकता है.

एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ेगी
यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्‍लॉक है. इस डील के बाद भारतीय प्रोडक्‍ट्स पर इम्‍पोर्ट ड्यूट कम या फिर खत्‍म हो जाएगी. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप अमेरिका पर निर्भरता खत्‍म करने के लिए भारत के ऑर्म्‍स की ओर देख रहा है, ऐसे में हथियारों की सप्‍लाई भारत से बढ़ सकती है. इसके साथ ही टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा प्रोडक्‍ट्स, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी और सर्विस सेक्टर चीजों का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ने की उम्‍मीद है. 

एफटीए डील के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन को वो चीजें भी भेजी जाएंगी, जो भारत में बनती हैं. इसमें डिफेंस इक्‍यूपमेंट से लेकर अन्‍य मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. साथ ही कम लागत में रॉ-मैटेरियल भी यूरोप से आ सकेंगे, जिससे कम लागत में चीजों का भारत में निर्माण होगा. बड़े स्‍तर पर निवेश भारत में आएगा, नई फैक्ट्रियां खुलेंगी और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा. 

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फिलहाल में EU में औसत टैरिफ लगभग 3.8% है, गारमेंट्स और ज्वेलरी जैसे सेक्टर पर करीब 10% टैरिफ लगता है. FTA से ये टैरिफ कटेंगे या हटेंगे, जिससे भारत के कपड़ा, ज्वेलरी, दवा और मशीनरी जैसे उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी और वहीं IT और प्रोफेशनल सेवाओं के लिए भी बाजार की पहुंच बढ़ेगी.

FTA के बाद यूरोपीय देशों को भारत के बड़े और बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी. वर्तमान में EU से भारत को निर्यात पर औसत 9.3% टैरिफ लगता है. FTA से ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरक्राफ्ट, रसायन और निवेश के सेक्टर में विस्तार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे दोनों तरफ के निर्यात और निवेश संबंध मजबूत होंगे. 

चीन पर निर्भरता कम होगी
EU से ये डील चीन पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा. भारत लंबे समय से चीन का विकल्‍प तलाश रहा है. भारत के लिए यूरोप एक भरोसेमंद सप्‍लाई चेन पार्टनर बन सकता है. फिर बहुत सी चीजों पर चीन से निर्भरता कम होगी. साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नई फंडिंग मिल सकती है. 

यूरोप बड़े स्‍तर पर अमेरिका को फंड देता है, लेकिन अब अमेरिका उतनी तेज से ग्रो करने वाली इकोनॉमी नहीं है और बार-बार अमेरिकी दबाव के कारण यूरोप को कई समस्‍याओं का भी सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में भारत यूरोप के लिए बड़ा मार्केट बन सकता है, जिसमें वे दाव लगा सकते हैं, क्‍योंकि भारत के इकोनॉमी अभी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है. यूरोपीय निवेश से स्‍टॉर्टअप्‍स को भी बेनिफिट्स होगा. 

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