HDFC Rate Cut: रेपो रेट पर फैसला कल, इस बैंक ने आज ही सस्ता कर दिया कर्ज

HDFC Bank Cuts MCLR: एचडीएफसी बैंक ने एमसीएलआर में 5 बेसिस पॉइंट की कटौती का तोहफा दिया है. कुछ सेलेक्टेड अवधि के लोन के लिए इन्हें घटाया गया है, जिसका सीधा असर Loan EMI पर देखने को मिलेगा.

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एचडीएफसी बैंक ने दिया ग्राहकों को तोहफा. (File Photo: ITG) एचडीएफसी बैंक ने दिया ग्राहकों को तोहफा. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:50 PM IST

क्या आप एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के ग्राहक हैं, तो ये आपके लिए गुड न्यूज है. दरअसल, मार्केट कैप के लिहाज से देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ने अपना कर्ज सस्ता कर दिया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एमपीसी बैठक चल रही है और रेपो रेट को लेकर फैसला बुधवार को आने वाला है, उससे पहले ही बैंक ने अपने ग्राहकों को ये तोहफा दे दिया है. बैंक की ओर से अलग-अलग टैन्योर के लोन पर रेट कट किए गए हैं और इसका असर Loan EMI में कमी के रूप में देखने को मिलेगा. 

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मंगलवार से लागू नई दरें!
HDFC Bank ने कुछ सेलेक्टेड लोन पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट्स यानी MCLR कम कर दिया है. इसमें 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है. इसके बाद एलसीएलआर से जुड़े लोन लेने वाले ग्राहकों को लाभ होगा. बैंक की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक द्वारा बदली गईं नई दरें, मंगलवार 7 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई हैं. 

एमसीएलआर में कटौती के बाद अब HDFC Bank की दरें लोन टैन्योर के आधार पर 8.10% से 8.55% तक हो गई हैं, जो कि इससे पहले 8.15% से 8.55% के दायरे में थीं. 

HDFC Bank रेट में क्या बदलाव? 
गौरतलब है कि एचडीएफसी बैंक ने कुछ शॉर्ट टर्म लोन पर MCLR Cut का तोहफा दिया है, जबकि ज्यादातर लॉन्ग टर्म लोन की ब्याज दरों को यथावत रखा है. बदलाव पर नजर डालें, तो अब एक रात से एक माह तक के कर्ज पर MCLR 8.15% से कम होकर 8.10% हो गया है. वहीं 3 महीने के कर्ज के लिए दर 8.25% के बजाय अब 8.20% होगी. इसके अलावा 6 महीने, 1 साल या 2-3 साल के लोन के लिए एमसीएलआर को चेंज नहीं किया गया है. 

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बता दें कि MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिससे कम रेट पर बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता. अगर आप होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन ले रहे हैं, तो बैंक का MCLR आपकी EMI पर सीधा असर डालता है. MCLR बढ़ने पर लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ जाता है, जिससे आपकी EMI ज्‍यादा हो जाती है. MCLR घटने पर लोन का इंटरेस्ट कम हो जाता है, जिससे आपकी EMI सस्ती हो जाती है.

MCLR घटने से आपको सस्ता लोन मिल सकता है. वहीं जिन लोगों का लोन पहले से चल रहा है, उनकी EMI में भी कमी आ सकती है. एमसीएलआर को तय करने के लिए कई अहम फैक्टर्स पर फोकस दिया जाता है. इसमें बैंक की डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट और कैश रिजर्व रेशो को बनाए रखने का खर्च शामिल होता है. रेपो रेट और रिजर्व रेपो रेट में बदलाव के साथ ही एमसीएलआर पर भी असर होता है.

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