Bank Locker Rule: बैंक लॉकर से सामान गायब... तो Bank लेगा जिम्मेदारी या करेगा इनकार? जानिए नियम

Bank Locker Rules: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक लॉकर के लिए तमाम तरह के नियम तय किए हुए हैं, जिनमें किस स्थिति में ग्राहकों को कितना मुआवजा मिलता है और कहां बैंक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होती है.

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बैंक लॉकर को लेकर आरबीआई ने तय किए हैं नियम. (File Photo: ITG) बैंक लॉकर को लेकर आरबीआई ने तय किए हैं नियम. (File Photo: ITG)

दीपक चतुर्वेदी

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

क्या आप भी अपने जेवर या अन्य कीमती सामान बैंक लॉकर में रखते हैं, अगर हां, तो फिर ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, हाल ही में पश्चिमी दिल्ली के कीर्ति नगर इलाके में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में महिला के लॉकर से सोना चोरी होने का मामला सामने आने के बाद इसकी सेफ्टी पर सवाल उठने लगे. तो जान लेते हैं कि अगर Bank Locker में रखे जेवर गायब हो जाएं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, लॉकर में रखीं चीजों की क्या बैंक गारंटी लेता है? अगर बैंक में रखीं चीजें चोरी हो जाती हैं, तो फिर क्या होगा? इसके लिए RBI Bank Locker Rule जानना जरूरी है...

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लॉकर में रखा सोना और ज्वैलरी गायब
आमतौर पर लोग घर पर रखने में खतरा और बैंक लॉकर (Bank Locker) में ये कीमती चीजें सुरक्षित रहेंगी, ऐसा सोचकर इसे लेते हैं. लेकिन, Bank Locker से जुड़ा ताजा मामला नई दिल्ली के कीर्ति  नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की ब्रांच का है, जिसमें सास-बहू दोनों अपने जॉइंट लॉकर को खोलने पहुंची और उसमें रखा सोना और अन्य ज्वैलरी गायब पाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके टूटने या जबर्दस्ती खोले जाने के सबूत नहीं मिले. इस तरह की घटनाओं से ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या सही में बैंक लॉकर सुरक्षित है? 

जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकता बैंक
RBI की गाइडलाइंस को देखें, तो साफ किया गया है कि किसी ग्राहक को नुकसान होने की स्थिति में अब बैंक शर्तों का हवाला देकर मुकरा नहीं सकेगा, ताकि ग्राहक की पूरी भरपाई हो सकेगी. RBI Rule के मुताबिक, बैंकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके द्वारा कराए गए लॉकर एग्रीमेंट में कोई अनुचित शर्त तो शामिल नहीं हैं, जिससे ग्राहकों को नुकसान हो. 

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ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के तमाम मामलों में देखने को मिलता रहा है कि बैंक एग्रीमेंट के शर्तों का हवाला देते हुए किनारा कर लेते हैं. लेकिन ग्राहकों को राहत देने के लिए RBI ने नियमों को सख्त किया है, बैंक की लापरवाही से ग्राहक को हुए नुकसान पर बैंक अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला ना झाड़ सके. गाइडलाइंस के मुताबिक, लापरवाही के चलते लॉकर में रखे सामान के किसी भी नुकसान के मामले में बैंक भुगतान करने के पात्र होंगे. 

कहां बैंक जिम्मेदार, कहां नहीं? 
RBI के नियमों के मुताबिक, लॉकर में रखे सामान के नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार होंगे. हालांकि, ध्यान रहे कि आग, चोरी, डकैती, इमारत ढहने जैसे मामले में हुए आर्थिक नुकसान का ही वहन बैंक करेगा. क्योंकि ये ऐसे मामले हैं, जिन्हें होने से बैंक रोका जा सकता है. वहीं अगर भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से कोई क्षति होती है, तो फिर ऐसे मामलों में बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती, यानी पूरा का पूरा नुकसान ग्राहक का होता है. 

बैंक लॉकर में क्या रखें, क्या नहीं?
Bank Locker देते समय बैंक एग्रीमेंट में स्पष्ट तौर पर बताया जाता है कि उसमें ग्राहक किस तरह का सामान रख सकता है और किस प्रकार का नहीं. नियम के मुताबिक, ग्राहक सिर्फ ज्वेलरी, जरूरी डॉक्युमेंट और कानूनी तौर पर वैध सामान ही रख सकते हैं. वहीं लॉकर में हथियार, नकदी या विदेशी मुद्रा या दवाएं या कोई घातक सामान नहीं रखा जा सकेगा.  खास बात ये है कि बैंक लॉकर खोलने या ऑपरेट करने के लिए एक्सिस भी लॉकर होल्डर को ही होता है, यानी परिवार का कोई अन्य इसे नहीं खोल सकता. 

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हालांकि, अगर लॉकर होल्डर ने अपने लॉकर के लिए किसी को नॉमिनी बनाता है, तो उसके निधन के बाद उस नॉमिनी को लॉकर खोलने और उसके सामान को निकालने का अधिकार होता है, लेकिन पूरे वेरिफिकेशन के बाद ही एक्सेस मिलता है. 

बैंक नहीं जानता क्या सामान, फिर हर्जाना कितना?
अब बैंक लॉकर की एक खास बात पर गौर करते हैं. दरअसल, बैंक में Locker के अंदर रखे जा सकने वालों की लिस्ट या जानकारी तो ग्राहक को दी जाती है, लेकिन वो उस लॉकर में क्या और कितना रखता है, इसकी डिटेल बैंक के साथ शेयर करना जरूरी नहीं होता. यानी बैंक को पता नहीं होता है कि कितनी Gold-Silver Jewellery रखी है, या कौन से जरूरी डॉक्युमेंट्स रखे हैं. उनके पास सिर्फ लॉकर किसके नाम पर है, कब और कितनी बार यूज किया गया और अन्य केवाईसी डिटेल होती है. मतलब ग्राहक द्वारा लॉकर में रखे गए सामानों की लिस्ट उसके पास नहीं होती है. 

अब बैंक को जब पता ही नहीं कि उसमें क्या-क्या रखा है, तो फिर चोरी या आग या फिर अन्य हादसे के बाद वो ग्राहक के नुकसान की भरपाई कैसे करेगा. इसके लिए आरबीआी ने रूल बनाए हैं. मुआवजे को लेकर शर्त ये है कि बैंकों की जिम्मेदारी लॉकर के वार्षिक किराये के 100 गुना तक ही होगी. यानी अगर लॉकर में का सालाना 5000 रुपये है, तो फिर आपको सिर्फ 5 लाख का ही मुआवजा मिल पाएगा, भले ही आपने लॉकर में 50 लाख का सामान क्यों न रखा है. ऐसे में Bank Locker लेते समय आपको सालाना किराये के 100 गुने से अधिक कीमत का सामान इसमें रखने से बचना चाहिए. 

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