8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? OPS की बहाली... बैठक के पहले दिन क्‍या हुआ

आठवें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बढ़ोतरी, भत्ता और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर मांग की गई है. इसी को लेकर दिल्‍ली में बैठक चल रही है. आइए जानते हैं बैठक के पहले दिन क्‍या-क्‍या हुआ.

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दिल्‍ली में आठवें वेतन आयोग की बैठक. (Photo: X/8th Pay Commission) दिल्‍ली में आठवें वेतन आयोग की बैठक. (Photo: X/8th Pay Commission)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

आठवें वेतन आयोग की टीम अब ग्राउंड स्‍तर पर उतर गई है और एक के बाद एक राज्‍यों में कर्मचारी संघों से मुलाकात कर रही है, उनके साथ बैठकें कर रही है, जिसमें सैलरी, फिटमेंट फैक्‍टर और भत्तों को लेकर चर्चा चल रही है. पहले उत्तराखंड में इसे लेकर बैठक हुई थी और अब दिल्‍ली में ये बैठक चल रही है. 

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28 अप्रैल को शुरू हुई ये मीटिंग 30 अप्रैल तक जारी रहेगी. इस बैठक में कर्मचारी यूनियनों की ओर से मांग रखी जाएगी, जिसकी टीम समीक्षा करेगी और उसी आधार पर आगे के लिए रिपोर्ट तैयार करेगी. ताकि यह तय किया जा सके कि 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी में कितना इजाफा हो सकता है? साथ ही इस आयोग के तहत कौन-कौन सी सुविधाएं उन्‍हें दी जा सकती हैं? 

8वें वेतन आयोग के तहत पहले दिन की बैठक यानी 29 अप्रैल को कई अपडेट सामने आए हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट में इसपर विस्‍तार से जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं पहले दिन की बैठक के दौरान क्‍या-क्‍या हुआ.

पहले दिन बैठक के अंदर क्या हुआ?
लगभग 36 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले मिश्रा ने कहा कि पहला दिन कर्मचारी प्रतिनिधियों और आयोग के बीच पहली औपचारिक बातचीत थी. उन्‍होंने कहा कि मैंने उन्‍हें समझाने की कोशिश की कि NC-JCM करीब 36 लाख सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें रेलवे, रक्षा, सिविल सेवा, आयकर, डाक, लेखा परीक्षा शामिल हैं.  

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उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की ओर से पहले ही एक डिटेल मांग पेश किया जा चुका है और बैठक का उपयोग इसके मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करने के लिए किया गया है. इसकी खास मांगे कुछ इस तरह हैं. 

1. फिटमेंट फैक्टर लगभग 3.83

2. न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये

3. पुरानी पेंशन सिस्‍टम की बहाली

मिश्रा ने कहा कि 69,000 रुपये का न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्‍टर आपस में जुड़े हुए हैं और इन पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक सैलरी कैलकुलेशन करने के तरीके में बदलाव था. मिश्रा ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था पुरानी और अनुचित है.

उन्होंने कहा कि पहले की कैलकुलेशन उन यूनिट्स पर बेस थीं, जिनमें पुरुष को 1 और महिला को 0.8 माना जाता था. यह लैंगिक भेदभाव है, जिसे स्वीकार्य नहीं‍ किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि बच्चों को एक यूनिट के रूप में माना जाना चाहिए और माता-पिता को भी परिवार इकाई में शामिल किया जाना चाहिए, इसके लिए उन्होंने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत सामाजिक वास्तविकताओं और कानूनी दायित्वों दोनों का हवाला दिया. 

जीवनयापन लागत का फॉर्मूला 
संघ ने यह भी तर्क दिया कि वेतन तय के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पुराने मापदंड अब बदल गए हैं. उन्होंने बताया कि पहले के आहार संबंधी गणनाएं कम कैलोरी सेवन पर आधारित थीं, जबकि आईसीएमआर के नए मानक उच्च आवश्यकताओं का सुझाव देते हैं.

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उन्होंने कहा कि आज लोगों की अपेक्षाएं बदल गई हैं. अगर वह सुविधा प्रदान नहीं की गई, तो लोगों को और दस साल इंतजार करना पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि मोबाइल के उपयोग, डेटा की खपत और बेहतर गुणवत्ता वाले कपड़ों जैसी आधुनिक जरूरतों को वेतन की गणना में शामिल किया जाना चाहिए. 

सैलरी ग्रोथ और प्रमोशन  
सालाना सैलरी ग्रोथ 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी कर दी गई है. एचआरए, ट्रैवेल और अन्‍य अलाउंस में तीन गुना तक बढ़ोतरी की मांग है. प्रमोशन से जुड़े पहले लाभों की बहाली की जाएगी. मिश्रा ने कहा कि हमने गणना की है कि भत्ते कम से कम तीन गुना होने चाहिए.

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