सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल के निर्यात पर लगाया 3 रुपये का विंडफॉल टैक्स, डीजल-ATF ड्यूटी घटी

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो इसका असर महंगाई और आयात खर्च पर भी पड़ सकता है. भारत में ईंधन कीमतों का असर परिवहन, कृषि, विनिर्माण और खुदरा बाजार समेत लगभग हर क्षेत्र पर पड़ता है.

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पश्चिम एशिया संकट की वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है. (Photo-ITG) पश्चिम एशिया संकट की वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है. (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:14 AM IST

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 प्रति लीटर की दर से स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) यानी विंडफॉल टैक्स लगा दिया है. वहीं दूसरी तरफ, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कटौती की गई है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें आज, 16 मई से प्रभावी हो गई हैं.

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 23 रुपये प्रति लीटर थी. वहीं ATF पर ड्यूटी 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.

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देश के आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
भारतीय उपभोक्ताओं और आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि इस फैसले का घरेलू बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. स्थानीय खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली घरेलू एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

सरकार की इस रणनीति से देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे आम आदमी का बजट प्रभावित होने से बच जाएगा. साथ ही पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य रखा गया है.

यह भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर, कर्नाटक में 30% तक बढ़ा प्राइवेट बसों का किराया

सरकार ने मार्च 2026 में पहली बार डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क लगाया था. बाद में अप्रैल में वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए इसमें कई बार संशोधन किया गया. 11 अप्रैल की समीक्षा में ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी की गई थी, जबकि 30 अप्रैल को इसमें राहत दी गई थी. अब सरकार ने पेट्रोल पर भी टैक्स लागू कर दिया है.

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विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा और वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी. इसका एक और मकसद एक्सपोर्ट करने वालों को कीमतों में अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी था.

सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अत्यधिक फायदा उठाने से रोकना है. इससे घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी

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