केंद्र सरकार के राहत पैकेज के तहत घोषित MSME को 3 लाख करोड़ रुपये की लोन योजना को अच्छी सफलता मिलती दिख रही है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक अब तक इस योजना के तहत 37 दिन में 1 लाख करोड़ रुपये के लोन मंजूर किए जा चुके हैं, यानी एक-तिहाई लक्ष्य तो अभी पूरा हो गया.
इसमें से 45,000 करोड़ रुपये के कर्ज वितरित किए जा चुके हैं. कोरोना संकट से परेशान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के तहत ही इस योजना का ऐलान किया था.
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आत्मनिर्भर भारत के तहत ऐलान
आत्मनिर्भर पैकेज के तहत सरकार ने एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को 3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज देने की अपनी योजना की घोषणा की थी. ऐसे उद्यमी अपने मौजूदा कर्जों की 20 प्रतिशत धनराशि अतिरिक्त कर्ज के रूप में किफायती ब्याज दर पर लेने के लिए पात्र थे.
सरकार की 100 फीसदी आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) के अंतर्गत, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक 26 जून, 2020 तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्जों को स्वीकृति दे चुके हैं, जिसमें से 45,000 करोड़ रुपये के कर्ज वितरित किए जा चुके हैं.
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30 लाख से ज्यादा को मदद
वित्त मंत्रालय का कहना है कि इससे लॉकडाउन के बाद 30 लाख से ज्यादा एमएसएमई इकाइयों और अन्य उपक्रमों को अपना कारोबार फिर से शुरू करने में सहायता मिलेगी.
ईसीएलजीएस के अंतर्गत सार्वजनिक बैंक 57,525.47 करोड़ रुपये के कर्जों को स्वीकृति दे चुके हैं, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक इसके तहत 44,335.52 करोड़ रुपए के कर्ज स्वीकृत कर चुके हैं. इस योजना के अंतर्गत अग्रणी कर्जदाताओं में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, कैनरा बैंक और एचडीएफसी शामिल हैं.
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