फंसे हुए प्रोजेक्ट्स के लिए 'संजीवनी' बना स्वामी फंड, सरकार के एक फैसले ने बदल दी 53 लाख लोगों की जिंदगी

केंद्र सरकार का 'स्वामीह इन्वेस्टमेंट फंड' देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हुआ है. इस फंड ने अब तक 110 ठप पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा कर 61,000 परिवारों को उनके घर की चाबियां सौंपी हैं. इस पहल से न केवल 53 लाख लोगों के जीवन पर असर पड़ा है, बल्कि 36,000 से ज्यादा नौकरियां भी पैदा हुई हैं.

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ठप पड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 'संजीवनी' बना यह फंड (Photo: ITG) ठप पड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 'संजीवनी' बना यह फंड (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

अपना घर खरीदने के लिए जीवनभर की जमा-पूंजी लगा देने वाले उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है, जिनका आशियाना सालों से अधर में लटका हुआ था. केंद्र सरकार का 'स्वामी इन्वेस्टमेंट फंड' (Special Window for Affordable and Mid-Income Housing) देश के ठप पड़े रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मसीहा बनकर उभरा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस एक फैसले ने न केवल डूबते हुए प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू किया, बल्कि देश के करीब 53 लाख लोगों के जीवन पर सीधा और सकारात्मक असर डाला है. तो चलिए जानते हैं कि कैसे इस सरकारी फंड ने ठप पड़े प्रोजेक्ट्स की सूरत बदल दी और लाखों चेहरों पर मुस्कान लौटाई.

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सालों का इंतजार खत्म, 61,000 परिवारों को मिला घर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवंबर 2019 में शुरू किया गया यह फंड उन आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बना, जो पैसों की कमी या कानूनी पचड़ों की वजह से रुके हुए थे. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 दिसंबर 2025 तक देश के 30 अलग-अलग शहरों में अब तक 110 ठप पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा कर लगभग 61,000 घरों की चाबियां उनके मालिकों को सौंपी जा चुकी हैं. इसमें सबसे बड़ी राहत उन खरीदारों को मिली है जो सालों से अपने घर की ईएमआई (EMI) और रहने का किराया, दोनों का बोझ एक साथ ढो रहे थे. इन घरों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बने 7,000 से ज्यादा घर भी शामिल हैं.

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रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिला नया रफ्तार

स्वामी फंड का असर सिर्फ चारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहा. इसने निर्माण क्षेत्र में जान फूंकते हुए 36,160 से ज्यादा लोगों के लिए नौकरी के अवसर पैदा किए, जिनमें करीब 3,520 स्थायी पद शामिल हैं. गौर करने वाली बात यह है कि इस काम में महिलाओं की भागीदारी भी 15% रही है. सिर्फ घर ही नहीं, इन प्रोजेक्ट्स ने डूबते हुए उद्योगों में भी जान फूंकी है. अब तक निर्माण कार्यों में 20 लाख टन सीमेंट और 5.5 लाख टन स्टील की खपत हो चुकी है. साथ ही, टैक्स और स्टांप ड्यूटी के जरिए सरकार की झोली में भी ₹6,900 करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम राजस्व आया है.

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विश्वास की बहाली और 'स्वामी-2' की तैयारी

आज यह फंड देश में अटके हुए घरों की समस्या को सुलझाने वाला सबसे बड़ा मंच बन चुका है, जिसने निवेशकों के बीच एक बार फिर भरोसा जगाया है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सहायक कंपनी 'एसबीआई वेंचर्स' की देखरेख में चल रहे इस फंड ने अब तक 127 परियोजनाओं के लिए 37,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है. इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर सरकार ने बजट 2025-26 में 'स्वामी फंड-2' का एलान कर दिया है. यह 15,000 करोड़ रुपये का एक नया और बड़ा कोष है, जिसमें सरकार के साथ-साथ बैंक और निजी निवेशक भी शामिल होंगे. इस दूसरे फंड का सीधा लक्ष्य एक लाख और घरों के निर्माण को रफ्तार देना है, ताकि उन सभी खरीदारों का इंतजार खत्म हो सके जो आज भी अपने आशियाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

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