अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में मशहूर पूर्वोत्तर भारत तेजी से विकास कर रहा है. यहां के उभरते शहर अब केवल सैलानियों की पसंद नहीं, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रीमियम लाइफस्टाइल के नए केंद्र बन रहे हैं.
नॉर्थ ईस्ट में निवेश की चर्चा के बीच यह समझना बेहद जरूरी है कि यहां का रियल एस्टेट बाजार देश के अन्य हिस्सों जैसा नहीं है. संविधान के विशेष प्रावधानों (जैसे आर्टिकल 371) और स्थानीय जनजातीय कानूनों के तहत मेघालय, नगालैंड और मिजोरम जैसे कई राज्यों में बाहरी व्यक्तियों के जमीन खरीदने पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध है.
यहां संपत्तियों का मालिकाना हक मुख्य रूप से स्थानीय आदिवासियों और मूल निवासियों के पास सुरक्षित है. ऐसे में विकास का यह लाभ और निवेश के ये अवसर प्रमुख रूप से उन क्षेत्रों जैसे गुवाहाटी या सिलीगुड़ी के कुछ हिस्से के लिए हैं, जहां कानून अनुमति देता है, या फिर यह उन स्थानीय लोगों के लिए एक सुनहरा मौका है जो अपनी पुश्तैनी संपत्तियों को आधुनिक टाउनशिप और कमर्शियल हब में बदलते देख रहे हैं.
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गुवाहाटी है निवेश के लिए सबसे बेस्ट
असम का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला गुवाहाटी वर्तमान में पूर्वोत्तर भारत के रियल एस्टेट बाजार का सबसे बड़ा 'पावरहाउस' बनकर उभरा है. पिछले कुछ वर्षों में यहां संपत्ति की कीमतों में 8-10% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो इसे निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और अत्यधिक लाभदायक गंतव्य बनाती है. इस उछाल का मुख्य श्रेय शहर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जाता है. जिनमें रिंग रोड का विकास, प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का आधुनिक विस्तार शामिल है. इन परियोजनाओं ने न केवल कनेक्टिविटी को सुगम बनाया है, बल्कि शहर के बाहरी इलाकों में भी जमीन की मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है.
असम की सांस्कृतिक राजधानी जोरहाट अब मध्यम और छोटे निवेशकों के लिए पहली पसंद बन रही है, बेहतर सड़क नेटवर्क और शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार ने यहां आवासीय मांग बढ़ाई है. अन्य भारतीय शहरों की तुलना में यहां जमीन और फ्लैट्स अभी भी किफायती हैं, जो आने वाले समय में अच्छे एप्रिसिएशन का वादा करते हैं.
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त्रिपुरा
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला आज अपनी भौगोलिक सीमाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल रही है. अगरतला-अखौरा रेल लिंक और इंडो-बांग्ला फ्रेंडशिप ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट्स ने न केवल यात्रा की दूरी कम की है, बल्कि माल ढुलाई को सुगम बनाकर यहां के कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में एक नई जान फूंक दी है. अब अगरतला केवल एक प्रांतीय राजधानी नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक रणनीतिक व्यापारिक केंद्र बन गया है, जिससे यहां वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस और रिटेल आउटलेट्स की मांग में उछाल आया है.
शिलॉन्ग: 'सेकंड होम' और वेकेशन रेंटल का हब मेघालय का शिलॉन्ग अब केवल एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि 'इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन' बन चुका है. पर्यटन में उछाल के कारण लोग यहां 'वेकेशन होम्स' या एयरबीएनबी (Airbnb) के लिए निवेश कर रहे हैं. यहां प्रीमियम विला और रिसॉर्ट-स्टाइल अपार्टमेंट्स की काफी मांग है, जो हाई रेंटल यील्ड देते हैं. शिलॉन्ग में रियल एस्टेट का विकास मुख्य रूप से स्थानीय निवासियों और राज्य के भीतर के निवेशकों द्वारा संचालित है, जो आधुनिक होमस्टे और प्रीमियम रेंटल मॉडल को अपना रहे हैं.
सिलीगुड़ी को अक्सर 'चिकन नेक कॉरिडोर' के नाम से जाना जाता है, जो भौगोलिक रूप से न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की जीवनरेखा है. भले ही यह शहर प्रशासनिक रूप से बंगाल का हिस्सा हो, लेकिन व्यवहारिक और आर्थिक रूप से यह सात उत्तर-पूर्वी राज्यों का मुख्य द्वार और सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है. यहां के रियल एस्टेट बाजार की सबसे बड़ी मजबूती इसका रणनीतिक स्थान और परिवहन नेटवर्क है. सिलीगुड़ी सड़क, रेल और हवाई मार्ग (बागडोगरा एयरपोर्ट) के जरिए भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ-साथ पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ता है, जिससे यह क्षेत्र का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बन गया है.
हालांकि अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों में सीधे तौर पर भूमि का मालिकाना हक प्रतिबंधित या वर्जित है, इसलिए निवेशक 'लीज' या 'ज्वाइंट वेंचर्स' जैसे विकल्पों को एक व्यावहारिक मार्ग के रूप में अपना सकते हैं.
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