रेपो रेट में बदलाव नहीं, रियल एस्टेट एक्सपर्ट बोले बायर्स-बिल्डर दोनों के लिए राहत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि दरों में बढ़ोतरी न होना देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का परिचायक है. इस फैसले से न केवल होम लोन की ईएमआई (EMI) स्थिर रहेगी, बल्कि घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के बीच सकारात्मक माहौल बनेगा.

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घर खरीदारों के लिए राहत वाली खबर (Photo-ITG) घर खरीदारों के लिए राहत वाली खबर (Photo-ITG)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है इसका मतलब है कि आपकी ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मॉनिटरी पॉलिसी की मीटिंग में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि दरों में बढ़ोतरी न होना इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत है. इससे न केवल खरीदारों का हौसला बढ़ेगा, बल्कि डेवलपर्स को भी नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने में मदद मिलेगी.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर, गौरव के सिंह का कहना है- "रियल एस्टेट सेक्टर के लिए रेपो रेट का स्थिर रहना एक बड़ी राहत है. जब ब्याज दरें नहीं बढ़तीं, तो घर खरीदने का मन बना रहे लोगों का भरोसा बना रहता है और वे बिना किसी डर के खरीदारी का फैसला ले पाते हैं. बिल्डर्स के लिए भी यह अच्छी खबर है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि लोन का खर्च कितना रहेगा, जिससे वे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की बेहतर प्लानिंग कर पाते हैं. खासकर दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में, मध्यम वर्ग और किफायती घरों की डिमांड में जो तेजी दिख रही है, वह इस स्थिरता के कारण और मजबूत होगी."

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पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ कहते हैं- ' ये फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के काफी सुकून देने वाला है. इससे पहले 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है, जिससे कर्ज लेने का माहौल बेहतर हुआ है और घर खरीदना अधिक किफायती बना है. इससे बायर्स का भरोसा बढ़ेगा और आवास की मांग बनी रहती है. डेवलपर्स के लिए भी फंडिंग की स्थिर स्थिति और बेहतर लिक्विडिटी से प्रोजेक्ट लॉन्च और निर्माण की योजना बनाना आसान होता है.”

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खरीदारों के लिए राहत

जीएचडी ग्रुप के सीएमडी, भारत ठाकरान ने का कहना है- ' "होम लोन की दरों में स्थिरता न केवल खरीदारों का हौसला बढ़ाती है, बल्कि एंड-यूज़र मार्केट को भी मजबूती देती है. गोवा जैसे बाजारों में दूसरे घरों और लाइफस्टाइल प्रॉपर्टीज के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण वहां मिलने वाला अच्छा रेंटल है. डेवलपर्स के लिए उधार की लागत अनुमानित रहने से प्रोजेक्ट की प्लानिंग और डिलीवरी आसान हो जाती है. आने वाले समय में शहरी इलाकों के मिड-इनकम और अफोर्डेबल सेगमेंट में घरों की बिक्री की रफ्तार और तेज होने की पूरी संभावना है.'

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 एम3एम इंडिया डायरेक्टर फाइनेंस यतीश वहाल का कहना है-  ब्याज दरों में स्थिरता और बजट 2026 के बड़े प्रोजेक्ट्स ने मिलकर घर खरीदारों के लिए एक सुनहरा मौका बनाया है, क्योंकि अब बिना ईएमआई बढ़ने के डर के घर खरीदना आसान होगा. इससे न केवल आम आदमी का बजट सुरक्षित रहेगा, बल्कि डेवलपर्स भी बेहतर प्लानिंग के साथ आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे कर सकेंगे. कुल मिलाकर, यह स्थिरता और सरकारी बुनियादी ढांचे का विकास प्रॉपर्टी बाजार को मजबूती देगा और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करेगा.

बिल्डर्स को भी होगा फायदा

 MORES के सीईओ मोहित मित्तल का कहना है-  आरबीआई का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे होम लोन की दरें स्थिर रहेंगी और लोगों का घर खरीदने का भरोसा बढ़ेगा. खासकर मध्यम और प्रीमियम श्रेणी के घरों की मांग बनी रहेगी और बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय दबाव के प्रॉपर्टी की कीमतें भी नियंत्रण में रहेंगी. इसके साथ ही, ब्याज दरें न बढ़ने से बिल्डर्स के लिए पैसों का इंतजाम करना और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना काफी आसान हो जाएगा.

वीवीआईपी ग्रुप के सेल्स एंड मार्केटिंग वीपी, उमेश राठौर का मानना है कि ' रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिरता का संकेत है. इस फैसले से घर खरीदारों का उत्साह बना रहेगा और डेवलपर्स अपने प्रोजेक्ट्स की सटीक प्लानिंग कर सकेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ब्याज दरों में संभावित कमी मांग को और तेज करेगी, जो रिहायशी और कमर्शियल दोनों ही बाजारों के लिए सुखद होगा."

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रियलिस्टिक रियल्टर्स के रीजनल डायरेक्टर, मोहित बत्रा के मुताबिक 'निवेश के फैसलों में रिटर्न की निश्चितता और लोन की स्थिति का स्पष्ट होना सबसे जरूरी है. वर्तमान आर्थिक स्थिरता और सुधारों के सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, निवेशक अब ऑफिस स्पेस, लॉजिस्टिक्स और मिक्स्ड-यूज जैसे हाई-ग्रेड प्रोजेक्ट्स की ओर अधिक आकर्षित होंगे. साथ ही, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण टियर-2 शहरों में निवेश के अवसर बढ़े हैं, जिससे प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा.

सीआरसी ग्रुप के डायरेक्टर,मार्केटिंग और बिज़नेस मैनेजमेंट,सलिल कुमार का कहना- 'भारत के अमेरिका और यूरोप के साथ हुए नए व्यापारिक समझौतों और बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिए गए जोर से प्रॉपर्टी बाजार को नई ताकत मिली है. घर खरीदने वालों के लिए आर्थिक स्थिरता बहुत मायने रखती है, क्योंकि ब्याज दरें स्थिर रहने से वे अपनी ईएमआई (EMI) का हिसाब आसानी से लगा सकते हैं. वहीं, बिल्डर्स के लिए भी अपने प्रोजेक्ट्स का बजट बनाना और उन्हें समय पर पूरा करना आसान हो जाता है.'

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रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल ने कहा, 'स्थिर ब्याज दरें न केवल खरीदारों का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि डेवलपर्स के लिए भी बेहतर प्लानिंग का रास्ता साफ करती हैं. वर्तमान में टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के चलते एंड-यूज़र डिमांड काफी स्ट्रॉन्ग है. ऐसे में यह अनुकूल वित्तीय माहौल इन ग्रोथ सेंटर्स में बिक्री के मोमेंटम को बनाए रखने और प्रोजेक्ट्स को तेजी से अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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