अक्सर जब हम अपने घर या बेडरूम का इंटीरियर डिजाइन करते हैं, तो सुंदरता बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े मिरर लगाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेडरूम में, खासकर बिस्तर के ठीक सामने शीशा लगाना आपकी मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.
आजतक रेडियो के शो 'प्रॉपर्टी से फायदा' में आर्किटेक्ट हाशिम अहमद खान कहते हैं - 'जब हम सुबह सोकर उठते हैं, तो हमारा मस्तिष्क तुरंत पूरी तरह सक्रिय नहीं होता. हम 'गफलत' यानी एक अर्ध-चेतन अवस्था में होते हैं. उस वक्त हमारे दिमाग में रात के सपने या कोई गहरा विचार चल रहा होता है. ऐसे में अचानक शीशे में अपनी ही परछाईं देखना आपको चौंका सकता है या डरा सकता है. यह मानसिक झटका आपके पूरे दिन के मूड को खराब कर सकता है. '
हाशिम का कहना है 'वैदिक साइंस और वास्तु के जानकारों के अनुसार, शीशा ऊर्जा को परावर्तित करता है. ऐसा माना जाता है कि मिरर के अंदर नकारात्मक ऊर्जाएं वास कर लेती हैं. अगर सोते समय आपकी परछाईं शीशे में दिखती है, तो यह आपकी शांतिपूर्ण नींद में खलल डाल सकती है. कुछ लोग इसे 'थर्ड डायमेंशन' के प्रभाव से भी जोड़कर देखते हैं, जो मानसिक रूप से असहज करने वाला हो सकता है.
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सीढ़ियों के नीचे पूजा घर क्यों नहीं?
हाशिम बताते हैं ' इसका कारण बहुत सरल और तार्किक है, जिस ईश्वर या ग्रंथ (गीता, कुरान, बाइबल) की आप पूजा करते हैं, क्या आपको अच्छा लगेगा कि कोई उनके ऊपर से पैर रखकर गुजरे? सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने का मतलब है कि आप पूजनीय स्थान के ऊपर से चलकर जा रहे हैं, जो सम्मान और शुचिता के विरुद्ध है.'
किचन और टॉयलेट अगल-बगल क्यों नहीं?
हाशिम कहते हैं ' इसका सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण हाइजीन है. टॉयलेट से निकलने वाली हानिकारक गैसें और कीटाणु हवा के जरिए किचन में प्रवेश कर सकते हैं. चूंकि किचन में खाना बनता है, जो वातावरण से अरोमा और हवा को सोखता है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.'
ये बातें सालों के अनुभव और रिसर्च का परिणाम हैं. वास्तु शास्त्र दरअसल एक प्राचीन 'आर्किटेक्चरल साइंस' है जो मानव मनोविज्ञान और पर्यावरण के संतुलन पर काम करता है.
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