मिडिल ईस्ट तनाव का रियल एस्टेट पर साया, बढ़ सकते हैं घरों के दाम

इजरायल और ईरान की जंग का असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ सकता है. अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो घरों के दाम पर भी असर पड़ सकता है, वहीं कई प्रोजेक्ट्स के पजेशन मिलने में भी देरी की संभावना है.

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सपनों का घर हो सकता है और महंगा (Photo-ITG) सपनों का घर हो सकता है और महंगा (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:32 AM IST

रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठनों क्रेडाई (Credai) और नारेडको (Naredco) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय तक चलने वाला युद्ध निर्माण लागत को बढ़ा सकता है. ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों के कारण स्टील और टाइल्स जैसी प्रमुख सामग्रियां महंगी हो सकती हैं. जिससे प्रोजेक्ट की समय-सीमा में देरी हो सकती है और घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

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यह प्रभाव मुख्य रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाओं के कारण है, जिसका असर स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों पर पड़ रहा है. इससे डेवलपर्स के मुनाफे पर भी दबाव बढ़ रहा है.

लगभग 20,000 डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों संगठनों ने निर्माण सामग्री की संभावित कमी के कारण रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने में होने वाली देरी पर भी चिंता व्यक्त की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक "स्टील, तार, पाइप और यहां तक कि कांच जैसी प्रमुख सामग्रियों की वर्तमान में कमी है. इसके अलावा, ईंधन से जुड़ी चुनौतियों के कारण सिरेमिक निर्माण जैसे क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं.

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प्रोजेक्ट को पूरा करने में भी हो सकती है देरी

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह "संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे निर्माण लागत में और वृद्धि हो सकती है और प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है. 

इससे पहले, एनारॉक (Anarock) द्वारा किए गए एक विश्लेषण में कहा गया था कि मार्च की शुरुआत से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रभावित किया है. इसकी वजह से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ गई है, सप्लाई चेन बाधित हुई है और परियोजनाओं में देरी या उनके रुकने का जोखिम बढ़ गया है.

स्टील की छड़ों की बढ़ती कीमतों का असर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद जैसे ऊंची इमारतों वाले बाजारों में निर्माण कार्य पर पड़ने की आशंका है. साथ ही, इससे लग्जरी घरों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि डेवलपर्स द्वारा दरों में 5% से अधिक की वृद्धि किए जाने की संभावना है.

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