दिल्ली- एनसीआर में घर का सपना देख रहे हजारों परिवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहत भरा फैसला दिया है. पिछले 15 सालों से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे सुपरटेक (Supertech) के करीब 51 हजार खरीदारों को राहत देते हुए कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया है. इस फैसले के तहत अब सुपरटेक के सभी लंबित प्रोजेक्ट्स को सरकारी निर्माण कंपनी NBCC (National Buildings Construction Corporation) पूरा करेगी.
सुपरटेक के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में लगभग 51,000 फ्लैट खरीदार फंसे हुए थे. इनमें से अधिकांश लोगों ने साल 2009, 2010 और 2011 में अपने जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर घर बुक किए थे. याचिकाकर्ताओं के वकील अश्विनी उपाध्याय का कहना है- ' इन 15 सालों में खरीदारों की पूरी पीढ़ी बदल गई, जिनके बच्चे स्कूल में थे, वे अब कॉलेज कर चुके हैं, लेकिन घर की चाबी आज भी उनसे दूर है. बिल्डर ने लोगों का पैसा लिया लेकिन लोगों को घर नहीं दिया. सैकड़ों लोगों की नौकरी चली गई, लोग किराया दे रहे हैं और ईएमआई भी भर रहे हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों को राहत की उम्मीद है. सुपरटेक के मालिकों का रिकॉर्ड रहा है कि वो बड़े-बड़े वादों करते हैं, लेकिन लोगों को घर नहीं देते हैं कई टॉवर खड़े हैं, लेकिन काम नहीं होने की वजह से वो जर्जर हो रहा है.'
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क्या है पूरा मामला?
सुपरटेक ने 90 के दशक और 2000 की शुरुआत में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से कई प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए. कंपनी ने 'इमेराल्ड कोर्ट' और 'सुपरटेक केप टाउन' जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ खुद को एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित किया. 2009-2011 के दौरान कंपनी ने 50,000 से ज्यादा फ्लैट्स की बुकिंग की और हजारों करोड़ रुपये जुटाए.
सुपरटेक के पतन की शुरुआत नोएडा के सेक्टर-93A स्थित 'इमेराल्ड कोर्ट' प्रोजेक्ट से हुई. यहां बिल्डर ने नियमों को ताक पर रखकर दो 40 मंजिला टावर खड़े कर दिए. रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन्हें गिराने का आदेश दिया, जिसके खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट चला गया. अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इन टावरों को अवैध घोषित करते हुए गिराने का आदेश दिया. 28 अगस्त 2022 को इन्हें विस्फोट के जरिए ढहा दिया गया, जिससे कंपनी की साख पूरी तरह खत्म हो गई.
सुपरटेक पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों का हजारों करोड़ का कर्ज हो गया. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर मार्च 2022 में NCLT (National Company Law Tribunal) ने सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) शुरू कर दी.
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अटके प्रोजेक्ट
फंड की कमी और कानूनी जांच के कारण कंपनी के 16 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए और निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुपरटेक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. आरोप लगा कि बिल्डर ने घर खरीदारों से लिए गए करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर दूसरी शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया. जून 2023 में ED ने सुपरटेक के चेयरमैन आर.के. अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया. उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और फंड डाइवर्ट करने के गंभीर आरोप लगे. वे लंबे समय तक जेल में रहे, जिससे कंपनी का प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया.
सुपरटेक प्रबंधन पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने खरीदारों से वसूला गया पैसा प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय अन्य संपत्तियां खरीदने या हवाला के जरिए ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया. वर्तमान में कई टावर केवल ढांचे के रूप में खड़े हैं. सरिया में जंग लग रहा है और प्लास्टर न होने के कारण निर्माण जर्जर होता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तुरंत काम शुरू नहीं हुआ, तो ये इमारतें रहने लायक नहीं बचेंगी.
NBCC करेगी अधूरा काम पूरा
जब यह साफ हो गया कि सुपरटेक अब खुद प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर सकता, तब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया. जिसके तहत सुपरटेक के इन अधूरे प्रोजेक्ट्स का नियंत्रण बिल्डर से छीनकर सरकारी एजेंसी NBCC (National Buildings Construction Corporation) को सौंप दिया गया है. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए NBCC को आदेश दिया है कि वह अगले 2 साल के भीतर इन 51,000 फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा करे.
साथ ही, अदालत ने बैंक और बिल्डर्स के बीच की संदिग्ध साठगांठ की CBI जांच के भी आदेश दिए हैं. यह फैसला उन होम बायर्स के लिए उम्मीद की आखिरी किरण है, जो पिछले 10-15 सालों से सिर्फ अदालतों और दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली केस की तर्ज पर अब सुपरटेक का मामला भी NBCC को सौंप दिया है. NBCC को अगले 2 साल के भीतर इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है. जब तक सुपरटेक के ये 16 प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं हो जाते, तब तक NBCC अपनी पूरी मैनपावर इसी काम में लगाएगी और कोई नया प्रोजेक्ट नहीं लेगी. एनबीसीसी को एक भरोसेमंद एजेंसी माना गया है जिसने पहले भी अधूरे प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया है.
जांच के घेरे में बिल्डर और बैंक
सुप्रीम कोर्ट ने न केवल घर दिलाने का रास्ता साफ किया है, बल्कि दोषियों पर शिकंजा भी कसा है. सुपरटेक के मालिकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले पहले से ही चल रहे हैं, कोर्ट ने बैंक और बिल्डर्स के बीच 'साठगांठ' की CBI जांच के आदेश दिए हैं. यह जांच उन अधिकारियों के खिलाफ होगी जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर बिल्डर को लोन दिए.
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