भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, यानी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आपके होम लोन या कार लोन की EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी. जो लोग नया घर खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से लोन चुका रहे हैं, उन्हें इस फैसले से बड़ी राहत मिली है क्योंकि बैंक अब ब्याज दरें नहीं बढ़ाएंगे. इस फैसले से बाजार में स्थिरता आएगी और लोन लेने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक अनिश्चितताएं काफी बढ़ी हुई हैं. केंद्रीय बैंक ने मौजूदा स्थिति के बदलावों पर कड़ी नजर रखते हुए सतर्कता भरा रुख अपनाने का विकल्प चुना है.
यह भी पढ़ें: Repo Rate: हो गया ऐलान... इस बार भी रेपो रेट में 'No Change', कम नहीं होगी EMI
घर खरीदारों के लिए इसके क्या मायने हैं?
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन ने कहा- “ रेपो रेट में कोई बदलाव न होना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत है. इस फैसले से होम बायर्स और डेलवपर दोनों को ही फायदा होगा. नए प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे और लोग घर खरीदने में दिलचस्पी दिखाएंगे.'
"वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन गौरव के सिंह ने आरबीआई के फैसले का स्वागत करते हुए कहा ये फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. स्थिर ब्याज दरें ग्राहकों को मानसिक मजबूती देती हैं, जिससे वे निवेश के लिए आगे आते हैं. डेवलपर्स के लिए भी यह फायदेमंद है क्योंकि इससे निर्माण लागत और प्रोजेक्ट के बजट को मैनेज करना आसान हो जाता है. '
जिंदल रियल्टी के सीईओ अभय मिश्रा ने आरबीआई के फैसले को रियल एस्टेट की मजबूती के लिए एक राह बताया है. उनका कहना है- ' रेपो रेट को स्थिर रखने से लोन की किस्तें नहीं बढ़ेंगी, जिससे घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों का मनोबल ऊंचा रहेगा और बाजार में डिमांड की रफ्तार कम नहीं होगी. '
अमरावती ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन रजनी कांत मिश्रा ने कहा- 'इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते दौर में ब्याज दरों की यह स्थिरता मांग को बरकरार रखने और डेवलपर्स को प्रोजेक्ट्स समय पर पूरा करने में मदद करेगी. हालांकि ब्याज दरों में कटौती होने से बाजार को और रफ्तार मिल सकती थी, लेकिन वर्तमान फैसला भी एक सुरक्षित और संतुलित माहौल देता है. कुल मिलाकर, यह कदम घर खरीदने वालों की बढ़ती दिलचस्पी और बाजार के दीर्घकालिक विकास के लिए फायदेमंद साबित होगा.'
को-वर्कज़ेन (CoWorkZen) के फाउंडर और CEO विशाल दत्त वधवा कहते हैं- 'ग्लोबल चुनौतियों और महंगाई के बीच रेपो रेट को स्थिर रखना एक समझदारी भरा फैसला है, जो बाजार को स्थिरता का भरोसा देता है. कंपनियों के लिए ब्याज दरों से ज्यादा जरूरी केंद्रीय बैंक का अनुशासन है, क्योंकि बड़े ऑफिस या वर्कस्पेस लीज पर लेने के फैसले लंबे समय की प्लानिंग पर टिके होते हैं. आरबीआई का यह संतुलित रुख कंपनियों को अपने विस्तार और ऑफिस सेटअप की योजनाओं को बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ाने में मदद करेगा.'
MORES के CEO मोहित मित्तल का कहना है कि 'केवल ब्याज दरों को स्थिर रखना काफी नहीं है, क्योंकि मिड और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट पहले से ही बढ़ती निर्माण लागत और खरीदारों की सीमित आय के बोझ तले दबा हुआ है. इस स्थिरता के दौर में असली जरूरत प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाने, रेरा (RERA) को और सख्ती से लागू करने और टीयर-2 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की है.'
यह भी पढ़ें: ईंट-सीमेंट की छुट्टी! ₹1.5 लाख में बनेगा अपना घर, भूकंप भी बेअसर
क्रीवा के सीईओ मयंक जैन कहते हैं- ' होमबायर्स के लिए रेपो रेट का स्थिर रहना 'इंतजार' बढ़ाने जैसा है, क्योंकि दरें कम न होने से लोन सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल पूरी नहीं हुई है. मिड-इनकम परिवारों के लिए EMI में कटौती एक बड़ी राहत होती, लेकिन वैश्विक तनाव और महंगाई के दबाव ने आरबीआई को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर किया है. '
ऑरा वर्ल्ड के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, श्यामरूप रॉय चौधरी कहते हैं-' पिछले साल मिली ब्याज कटौती की राहत आगे भी जारी रहेगी. यह स्थिरता न केवल आपकी ईएमआई को बढ़ने से रोकती है, बल्कि नए घर खरीदारों को भी बाजार में निवेश करने के लिए एक सुरक्षित और स्पष्ट माहौल प्रदान करती है. हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण महंगाई का जोखिम बना हुआ है, लेकिन आरबीआई का यह संतुलित रुख पॉलिसी पर भरोसा बनाए रखने में मदद करता है.'
जो लोग नया घर खरीदने की योजना बना रहे हैं या पहले से ही होम लोन की किस्तें चुका रहे हैं उनके लिए यह फैसला निश्चित रूप से राहत भरा है. रेपो रेट में कोई बदलाव न होने के कारण, उम्मीद है कि बैंक अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखेंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल आपकी EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी.
यह भी पढ़ें: ग्रेटर आगरा बनेगा 'दूसरा नोएडा', बनेंगे 10 नए सेक्टर, योगी ने दी ₹6466 करोड़ की सौगात
रिलायंस मॉडल इकोनॉमिक टाउनशिप के सीईओ श्रीवल्लभ गोयल के अनुसार, आरबीआई का रेपो रेट को स्थिर रखना विकास और महंगाई के बीच तालमेल बिठाने वाला एक संतुलित कदम है. इससे पहले किए गए बदलावों का असर बाजार में गहराई तक पहुंचेगा, जिससे आने वाले समय में कर्ज की उपलब्धता और खपत को मजबूती मिलेगी.
एम3एम इंडिया के डायरेक्टर (फाइनेंस) यतीश वहाल ने कहा , " अनिश्चितता के माहौल में रियल एस्टेट को मजबूती देने वाला एक रणनीतिक कदम है. यह स्थिरता न केवल डेवलपर्स को बेहतर प्लानिंग में मदद करेगी, बल्कि होम लोन की दरों में बदलाव न होने से घर खरीदारों का भरोसा भी बढ़ेगा. '
रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल का मानना है ' रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखना रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिरता और निवेश के भरोसे को बढ़ाएगा. स्थिर EMI और ब्याज दरों के कारण घर खरीदारों का मनोबल ऊंचा रहेगा, जिससे मिड और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट की मांग को और गति मिलेगी.'
स्मिता चंद