दुबई में हुए 'वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट' के दौरान तकनीक और फाइनेंस जगत के बड़े दिग्गजों ने भविष्य को लेकर खास चर्चा की. इंडिया टुडे से बात करते हुए ईएंड (e&) के खलीफा अल शम्सी, रॉबिनहुड के डैनियल गैलाघेर और इंसेप्शन के आशीष कोशी ने बताया कि हमारी बदलती डिजिटल आदतों की वजह से बैंकिंग, सरकारी कामकाज और रोजमर्रा की सेवाएं पूरी तरह बदल रही हैं.
इन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीक का मतलब सिर्फ इंटरनेट से जुड़े रहना भर नहीं होगा, बल्कि असली कामयाबी ऐसे AI प्लेटफॉर्म बनाने में है, जिनका इस्तेमाल दुनिया का हर इंसान आसानी से कर सके.
ईएंड (e&) के सीईओ खलीफा अल शम्सी का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियां अब केवल इंटरनेट स्पीड और नेटवर्क कवरेज देने तक सीमित नहीं रह गई हैं. अब ये कंपनियां बड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो रही हैं, जो आम उपभोक्ताओं, बड़े व्यवसायों और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं.
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वित्तीय समावेश और सुलभता पर जोर
उन्होंने भारत के UPI और ब्राजील के Pix का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सरकार द्वारा समर्थित डिजिटल बुनियादी ढांचा तकनीक को तेजी से अपनाने में मदद करता है. उनके अनुसार, जब सरकारें पहचान प्रणाली (identity systems), पेमेंट गेटवे और स्पष्ट नीतियां बनाने में निवेश करती हैं, तो निजी कंपनियों के लिए नई सेवाएं बनाना और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना बहुत आसान हो जाता है.
खलीफा अल शम्सी ने आगे कहा कि उनका मुख्य ध्यान समावेश (Inclusion) पर है. कई बाजारों में आज भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा वित्तीय सेवाओं से दूर है. डिजिटल पहचान (Digital ID), ई-केवाईसी (e-KYC) और ओपन फाइनेंस सिस्टम को एक साथ लाकर देश अपने अधिक से अधिक नागरिकों को बैंकिंग और फिनटेक नेटवर्क से जोड़ सकते हैं. अल शम्सी के अनुसार, सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाना अनिवार्य है, खासकर ब्लू-कॉलर वर्कर और उन लोगों के लिए जिनके पास बैंकिंग सुविधाओं की कमी है.
पुरानी वित्तीय व्यवस्थाओं को बदलती तकनीक
रॉबिनहुड के डैनियल गैलाघेर ने बताया कि कैसे उनकी कंपनी ने पहले दिन से ही वित्तीय सेवाओं को एक 'मोबाइल ऐप' के रूप में डिजाइन कर अपना व्यवसाय खड़ा किया. फीस और अकाउंट में न्यूनतम राशि (Minimum Balance) की शर्तों को हटाकर, उनके प्लेटफॉर्म ने उन युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया जो अपनी अधिकांश जिंदगी स्मार्टफोन पर बिताते हैं.
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उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर इतनी तेजी से हो रहे इनोवेशन के साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष करती हैं. उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में पुराने नियमों और कड़े नियामक माहौल ने नए वित्तीय प्लेटफॉर्म्स के लिए विकास करना मुश्किल बना दिया. इसके विपरीत, उन्होंने यूएई (UAE) के सक्रिय दृष्टिकोण की प्रशंसा की, जहां नियामक संस्थाएं क्रिप्टो और फिनटेक जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ मिलकर काम कर रही हैं.
गैलाघेर के अनुसार, नीति निर्माताओं के लिए उन तकनीकों को समझना बहुत जरूरी है जिन्हें वे नियंत्रित कर रहे हैं. अगर उनके पास इस तकनीक का ज्ञान नहीं होगा, तो वे देश पीछे छूट जाएंगे.
डिजिटल जीवन का अगला चरण: AI की ताकत
इंसेप्शन के सीईओ आशीष कोशी ने कहा कि डिजिटल जीवनशैली का अगला पड़ाव AI एजेंट्स द्वारा संचालित होगा, जो उपयोगकर्ताओं की ओर से काम करेंगे. अब लोगों को जटिल मेनू और ऐप्स चलाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे अपनी जरूरत (Intent) बताएंगे और इंटेलिजेंट सिस्टम उन कार्यों को खुद पूरा कर देंगे.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI को अपनाते समय केवल 'सुविधा' पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि संप्रभुता, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक प्रासंगिकता को भी महत्व देना चाहिए. स्थानीयकरण (Localisation) बहुत जरूरी है ताकि पक्षपात कम हो सके और सेवाएं हर किसी के लिए उपयोगी हों. खासकर उन बुजुर्ग नागरिकों के लिए जिन्हें पारंपरिक डिजिटल इंटरफेस इस्तेमाल करने में परेशानी होती है.
कोशी ने आगे कहा कि सरकारों और निजी कंपनियों को मिलकर 'डिसीजन इंटेलिजेंस' (Decision Intelligence) की इस नई परत को तैयार करना होगा. भविष्य उन्हीं प्रोडक्ट्स का होगा जो बाधाओं को कम करेंगे, चाहे वे सरकारी सेवाएं हों या सामान्य मोबाइल ऐप्स.
भविष्य की ओर देखते हुए, अल शम्सी ने कहा कि सबसे बड़ा अवसर डिजिटल सेवाओं को सरल बनाने में है, ताकि वे सभी आयु वर्ग और आय वर्ग के लोगों के लिए सुलभ हों. AI-संचालित सिस्टम उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञता के वित्तीय, मनोरंजन और व्यावसायिक लेन-देन करने में मार्गदर्शन कर सकते हैं.
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