एक दौर था जब भारतीय परिवारों के लिए घर खरीदने का मतलब सिर्फ अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ना होता था. लोग भावनात्मक होकर अपनी पूरी जमा-पूंजी घर में लगा देते थे, लेकिन समय के साथ सोच बदली है. आज का भारतीय निवेशक सिर्फ 'जज्बाती' नहीं, बल्कि 'स्मार्ट' और 'प्रैक्टिकल' हो गया है. अब वो घर सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि मुनाफे के लिए खरीद रहा है.
अब भारतीय निवेशकों की नजर देश की सीमाओं से बाहर जाकर ग्लोबल मार्केट पर टिक गई है और इस रेस में दुबई सबसे आगे निकल चुका है. जानकार देख रहे हैं कि भारतीय पैसा अब तेजी से मिडिल ईस्ट के रियल एस्टेट में लग रहा है. इसकी वजह सीधी है वहां पैसा सुरक्षित है, रेंट से होने वाली कमाई बेहतर है और जब मन चाहे प्रॉपर्टी बेचकर बाहर निकलना भी बहुत आसान है. आज का निवेशक वहीं पैसा लगा रहा है जहां उसे सबसे ज्यादा पारदर्शिता और ग्रोथ दिख रही है.
दुबई का दबदबा
दुबई के रियल एस्टेट बाजार में भारतीयों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुबई में विदेशी प्रॉपर्टी खरीदारों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 12% थी. यह निवेश लगभग 15.9 बिलियन दिरहम (करीब 3.91 लाख करोड़ रुपये) का था. सिर्फ एक साल बाद यानी 2024 में यह हिस्सेदारी लगभग दोगुनी होकर 22% तक पहुंच गई और निवेश की राशि 35 बिलियन दिरहम (करीब 8.61 लाख करोड़ रुपये) हो गई. यह रफ्तार 2025 में भी थमने का नाम नहीं ले रही है. साल 2025 की पहली छमाही (H1) में ही कुल विदेशी लेनदेन में भारतीयों की हिस्सेदारी 23% के करीब पहुंच गई है.
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भारतीय निवेशकों को क्यों भा रहा है दुबई?
दुबई के आलीशान रियल एस्टेट मार्केट के प्रति भारतीयों की इस दीवानगी के पीछे कई ठोस कारण हैं. भारतीय निवेशकों के लिए दुबई का बाजार अब बहुत सुरक्षित और 'प्रेडिक्टेबल' हो गया है. यहां जोखिम कम है और टैक्स की बचत बहुत ज्यादा है. रेंट से होने वाली कमाई (Rental Yield) यहां एक बड़ा गेम-चेंजर है. भारत के बड़े शहरों में रेंट से होने वाली कमाई महज 2 से 4% है, जबकि दुबई में यह 7 से 9% तक है. यह फर्क इतना बड़ा है कि कोई भी समझदार निवेशक इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता.
दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने के नियम बहुत साफ-सुथरे हैं. 'फ्रीहोल्ड ओनरशिप' और टाइटल सिस्टम में पारदर्शिता की वजह से भारतीयों का आत्मविश्वास यहां बहुत बढ़ गया है. समय के साथ दुबई में प्रॉपर्टी खरीदना अब पहले के मुकाबले काफी आसान और किफायती (Affordable) हो गया है. एक तरफ भारतीय अमीरों की संपत्ति बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ दुबई के घरों की कीमतें उनके बजट में फिट बैठने लगी हैं. यह एक ऐसा तालमेल है जिसने निवेश को और बढ़ा दिया है.
'स्क्वायरयार्ड्स' (Squareyards) के आंकड़ों के मुताबिक, दुबई में हाल ही में जितने भी घर बिके हैं, उनमें से करीब 73% घरों की कीमत 2 मिलियन दिरहम (लगभग 4.92 करोड़ रुपये) से कम थी. इससे भी दिलचस्प बात यह है कि कुल बिक्री में से 29.5% ट्रांजैक्शन तो ऐसे थे, जहां घर की कीमत 1 मिलियन दिरहम (करीब 2.46 करोड़ रुपये) से भी कम थी.
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