आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है. इसमें उसने साफ कर दिया है कि पेटीएम और रिलायंस जियो जैसी निजी कंपनियों का आधार डेटा लेना असंवैधानिक है.
इसके बाद सवाल उठने लगा है कि पेटीएम और रिलांयस जियो जैसी निजी कंपनियां, जो ज्यादातर आधार के जरिये ई-केवाईसी करवाती हैं, वे अब अपने कस्टमर की डिटेल्स को कैसे वेरीफाई करेंगे.
रिलायंस जियो और पेटीएम वॉलेट जैसी फिनटेक कंपनियों के कारोबार की रीढ़ ई-केवाईसी के आधार पर ही खड़ी हुई थी. ई-केवाईसी की धारणा आधार की मौजूदगी की वजह से ही संभव हो पाई थी.
लेकिन अब ई-केवाईसी करना मुश्किल होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अब अगर आप सिम कार्ड लेना चाहते हैं, तो अब उसे एक्टिवेट होने में वक्त लगेगा. अब स्टोर में गए और बाहर एक्टिव सिम के साथ आ गए, यह काम होना मुश्किल हो जाएगा.
इसका मतलब यह है कि सिम कार्ड एक्टिवेशन और हर वो काम, जिसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को केवाईसी की जरूरत पड़ती है, उसमें ज्यादा समय लगेगा. वेरीफिकेशन के अधिकतर मामलों में आपको टेलीकॉम कंपनी के सेंटर जाना होगा और वह अपना केवाईसी वेरीफिकेशन करवाना होगा.
यही स्थिति पेटीएम के साथ है. पेटीएम को अब फुल केवाईसी करवाने के लिए दूसरे तरीके खोजने होंगे. पेटीएम के मामले में भी अब ग्राहकों को फुल केवाईसी करने की खातिर पेटीएम सेंटर जाना पड़ सकता है. (Photo: Reuters)
हालांकि फिलहाल कंपनी की तरफ से इसको लेकर कुछ भी नहीं बताया गया है. आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पेटीएम के लिए केवाईसी करवाने में ज्यादा समय लगना तय है. (Photo: Reuters)
हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिया है कि वे निजी कंपनियों को आधार डेटा शेयरिंग की खातिर कानून ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखने के बाद अगर इसे कानून का सहारा दिया जा सकता है, तो ऐसा करने पर विचार किया जाएगा. (Photo: Reuters)