इंटरनेट पर रोजाना हजारों चीजें डाली जाती हैं. इसमें कुछ अच्छा होता, कुछ बुरा तो कुछ नकली भी शामिल होता है. ऐसी सामग्री को अपनी वेबसाइट से हटाने के लिए व दूर रखने की खातिर फेसबुक और गूगल जैसी कई कंपनियां कंटेंट मॉडरेटर्स की सहायता लेती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी खबरें चल रही हैं कि फेसबुक बड़ी संख्या में
कॉन्टेंट मॉडरेटर्स की भर्ती करने जा रहा है. बताया जा रहा है कि इनकी मदद
से फेसबुक अपने प्लैटफॉर्म को नकली और फेक कंटेंट से सुरक्षित रखना चाहता
है.
इंटरनेट के बढ़ते दायरे के साथ 'कंटेंट मॉडरेटर्स' न सिर्फ 'साइबर वॉरियर' के तौर पर सामने आ रहे हैं, बल्कि यह एक बेहतर करीयर का विकल्प भी बनता जा रहा है.
क्या होता है कॉन्टेंट मॉडरेशन:
कंटेंट मॉडरेशन का काम आज लगभग हर प्रतिष्ठित कंपनी अपने ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के लिए करती है. कंटेंट मॉडरेशन की सर्विस मुहैया कराने वाली Foiwe के संस्थापक सुमन हाउलैडर ने Aajtak.in से इस संबंध में बात की.
सुमन बताते हैं कि कंटेंट मॉडरेशन का मतलब यह होता है कि आपको किसी कंपनी की वेबसाइट पर चढ़ने वाले कंटेंट की निगरानी करनी होती है. जो भी कंटेंट साइट पर जा रहा है, वह वेबसाइट के तय मानकों के हिसाब से ही जा रहा है. ये सुनिश्चित करना होता है.
सुमन एक उदाहरण देकर इस काम को समझाते हैं. वह कहते हैं, ''मान लीजिए कोई शॉपिंग पोर्टल है. उस शॉपिंग पोर्टल के लिए कंटेंट मॉडरेशन का काम करने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि साइट पर कोई नकली उत्पाद न बिके. अगर ऐसा होता है, तो मॉडरेटर्स उनका पता लगाते हैं और उन्हें आगे ऐसा करने से रोकते भी हैं.''
फेसबुक और गूगल जैसी वेबसाइट्स अपनी साइटों पर डाले जाने वाले कंटेंट पर काफी ज्यादा ध्यान देती हैं. उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि कोई भी उनके प्लैटफॉर्म पर गलत या फिर आपत्तिजनक कंटेंट न डाले. इसलिए वह कंटेंट मॉडरेटर की सेवा लेते हैं.
कौन बन सकता है कंटेंट मॉडरेटर?
सुमन बताते हैं कि कंप्यूटर साइंस का कोई भी छात्र कंटेंट मॉडरेटर बनने के लिए एलिजिबल होता है. हालांकि कंप्यूटर साइंस में डिग्री के बाद ये भी देखा जाता है कि संबंधित व्यक्ति जिस प्रोडक्ट के लिए कंटेंट मॉडरेशन करने वाला है, उसकी उसे कितनी जानकारी है. इन दोनों मानकों के आधार पर कंटेंट मॉडरेटर चुने जाते हैं.
औसत कमाई क्या है?
Foiwe के संस्थापक सुमन बताते हैं कि कंटेंट मॉडरेटर की शुरुआती और औसत तनख्वाह 20 हजार रुपये होती है. वह इसके साथ ही कहते हैं कि कुछ लोग कंटेंट मॉडरेटर्स को कम आंकते हैं. लेकिन इन मॉडरेटर्स की बदौलत ही एक आम आदमी तक क्लीन और बेहतर व रियल कंटेंट पहुंच पाता है. (सभी फोटो प्रतीकात्मक)