भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) हो गया है. मंगलवार को इस 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother Of All Deals) कहे जा रहे वाले समझौते का ऐलान किया गया. ये भारत के लिए कई मायने में बड़े फायदे का सौदा है और सबसे बड़ा लाभ टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलता दिख रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि डील के तहत अब भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के देशों में जीरो टैरिफ एक्सपोर्ट (Zero Tariff Export) का एक्सेस मिलेगा. बता दें कि ईयू के कपड़ा बाजार का आकार 263.5 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) है.
एफटीए से टैरिफ फ्री निर्यात
India-EU FTA के तहत भारत को कपड़ा और परिधान सेक्टर में जीरो टैरिफ एंट्री का लाभ मिलेगा. अभी तक भारत से यूरोपीय देशों में भेजे जाने वाले कपड़ों पर अलग-अलग कैटेगरी में 9 से 12% तक का टैरिफ लागू होता है, जिसे डील में हुए समझौते के तहत या तो शून्य या महज 2-3 फीसदी तक सीमित किया जाएगा. इससे यूरोपीय संघ का का आयात बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए आसान और फायदे वाला साबित होगा.
US के बाद दूसरा बड़ा बाजार EU
गौरतलब है कि अमेरिका के बाद यूरोपीय संघ भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. ऐसे में ये डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए भी एक बड़ा झटका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2024 में यूरोपीय संघ का इस सेक्टर में वैश्विक आयात 263.5 अरब डॉलर (करीब 22.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का रहा था. इस बड़े कपड़ा बाजार में Zero Tariff Entry से मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत के निर्यात और रोजगार दोनों में तगड़ा उछाल देखने को मिलेगा.
भारत करता है कितना कपड़ा निर्यात?
भारत ग्लोबली हर साल 36.7 अरब डॉलर (करीब 3.19 लाख करोड़ रुपये) के कपड़ों का निर्यात करता है. इसमें यूरोपीय संघ को 62.7 हजार करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है. इस समझौते से सूत, कपास और मानव निर्मित फाइबर कपड़े, रेडीमेड कपड़े समेत अन्य टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के निर्यात में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है.
इससे दूसरा फायदा ये होगा कि यूरोप के बड़े बाजार में बेहतर और आसान पहुंच से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को अपने परिचालन की ग्रोथ, रोजगार पैदा करने और एक विश्वसनीय सोर्स पार्टनर के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है ये सेक्टर
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को लंबे समय से चली आ रही टैरिफ असमानता को दूर करने का मौका देता है. यूरोपीय संघ को भारत के कपड़ा निर्यात में रेडीमेड गारमेंट्स का हिस्सा करीब 60% है, इसके बाद सूती वस्त्रों का 17% और मानव निर्मित फाइबर (MMF) वस्त्रों का 12% हिस्सा है. इसके साथ ही हस्तशिल्प और कालीनों का हिस्सा 4-4%, जूट प्रोडक्ट्स का 1.5% हिस्सा है. वहीं भारत में कपड़ा उद्योग प्रत्यक्ष रूप से करीब 4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है.
आजतक बिजनेस डेस्क