क्‍यों नहीं मान रहे विदेशी निवेशक? मई में ₹27000 करोड़ की हुई निकासी

विदेशी निवेशकों द्वारा हर महीने भारतीय बाजार से पैसे निकाले जा रहे हैं. मई के दौरान FPI ने 27000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की बिकवाली की है.

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विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी. (Photo: Reuters) विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST

ग्‍लोबल इकोनॉमी और जियो-पॉलिटिक्स तनाव  के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला जारी है. FPI ने मई में अभी तक 27000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के भारतीय शेयर बेच डाले हैं.  

NSDL के डाटा को देखें तो विदेशी निवेशकों ने साल 2026 में अब तक FPI कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं. साल 2025 में उन्होंने भारतीय स्‍टॉक्‍स से 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे यानी पिछले दो सालों में विदेशी निवेशकों ने जबरदस्‍त बिकवाली की है. 

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लगातार बिकवारी जारी 
आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर इस साल अभी तक सभी महीनों में सेलर रहे हैं. जनवरी में विदेशी निवेशकों ने  35,962 करोड़ रुपये निकाले थे. हालांकि, फरवरी में उन्‍होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था. यह 17 महीने का सबसे बड़ा मंथली निवेश था. 

मार्च की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये का विड्रॅाल किया. अप्रैल के दौरान भी विदेशी निवेशकों ने भारी बिकवाली की और FPI ने 60,847 करोड़ रुपये निकाले और मई में भी बिकवाली का ट्रेंड बना हुआ है. 

क्‍यों लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी निवेशक? 
पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्‍टार इन्‍वेस्‍टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि भारत समेत उभरते बाजारों में निवेशकों की रिस्‍क लेने की क्षमता प्रभावित हुई है. इसके पीछे ग्‍लोबल इकोनॉमी को लेकर अनिश्चितता, अलग-अलग सेक्‍टर में बढ़ता जियो पॉलिटिकल तनाव और कच्‍चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कारण हैं. 

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वहीं अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिका बॉन्‍ड यील्‍ड ऊंचे स्‍तर पर रहने से डेवलपमेंट मार्केट में निवेश ज्‍यादा आकर्षक हो गया है. इससे निवेशक सेफ असेट की ओर बढ़ रहे हैं. साथ ही अमेरिकी बाजार में भी लगातार तेजी देखी गई है और यह रिकॉर्ड हाई पर है. ऐसे में विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पैसे निकालना स्‍वभाविक दिख रहा है. 

रुपये पर दबाव
FPI की लगातार बिकवाली और चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव दिख रहा है. साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्‍तर पर था, लेकिन 15 मई को यह गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है. यानी कि अगर तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहेगी और रुपये पर दबाव बना रहेगा. 

(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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